Professor Murder Case: पुश्तैनी मकान विवाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या, पति-पत्नी गिरफ्तार

Professor Murder Case: पुश्तैनी मकान विवाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर की हत्या, पति-पत्नी गिरफ्तार
रिपोर्ट: रवि डालमिया
पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर देबोश्मिता पॉल की हत्या के सनसनीखेज मामले का पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल ब्लाइंड मर्डर केस में पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्दवान निवासी पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके नाबालिग बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि हत्या की मुख्य वजह पुश्तैनी मकान को लेकर चल रहा विवाद था।
पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार 4 जून को न्यू अशोक नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली सहायक प्रोफेसर देबोश्मिता पॉल की हत्या की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस, फॉरेंसिक टीम और क्राइम ब्रांच की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने हत्या का समय 3 जून दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे के बीच तय किया।
जांच के दौरान पुलिस ने इलाके और सोसायटी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। करीब 13 संदिग्ध लोगों की गतिविधियों की जांच की गई। इनमें दो लोग ऐसे दिखाई दिए जिन्होंने अपने चेहरे मास्क से ढक रखे थे। सोसायटी के किसी भी निवासी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस का शक और गहरा हो गया।
तकनीकी जांच और सीसीटीवी ट्रैकिंग के जरिए पुलिस को पता चला कि संदिग्ध वारदात से पहले दिल्ली के दल्लूपुरा इलाके के एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे। वहां जमा कराए गए पहचान पत्रों से उनकी पहचान पश्चिम बंगाल के बर्दवान निवासी के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने उनकी गतिविधियों और यात्रा का पूरा रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया।
जांच में सामने आया कि हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी टैक्सी और ई-रिक्शा से आनंद विहार पहुंचे और वहां से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन गए। पुलिस के मुताबिक 3 जून की शाम करीब 5:40 बजे तीनों आरोपी पूर्वा एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल रवाना हो गए। अगले दिन वे बर्दवान पहुंचकर अपने ठिकाने पर छिप गए।
दिल्ली पुलिस की विशेष टीम तुरंत पश्चिम बंगाल रवाना हुई। स्थानीय पुलिस की मदद से बर्दवान रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों की सीसीटीवी फुटेज तथा तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 42 वर्षीय रामप्रसाद दास और उसकी 36 वर्षीय पत्नी बनश्री दास के रूप में हुई है। पुलिस उनके नाबालिग बेटे की भूमिका की भी अलग से जांच कर रही है।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2023 से आरोपी परिवार बर्दवान स्थित उस पुश्तैनी मकान में रह रहा था, जो पारिवारिक समझौते के तहत देबोश्मिता पॉल के हिस्से में आया था। बताया गया कि प्रोफेसर लगातार आरोपियों से मकान खाली करने को कह रही थीं और हाल ही में अंतिम चेतावनी भी दी गई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इसी विवाद के चलते आरोपियों ने हत्या की साजिश रची। योजना के तहत वे पश्चिम बंगाल से दिल्ली आए, वारदात को अंजाम दिया और उसी दिन वापस लौट गए ताकि किसी को उन पर शक न हो। हालांकि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी निगरानी और यात्रा रिकॉर्ड ने उनकी पूरी साजिश का खुलासा कर दिया।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कई अहम साक्ष्य भी बरामद किए हैं। इनमें मृतका का सैमसंग मोबाइल फोन, हत्या में इस्तेमाल किया गया उस्तरा, बैकपैक, घटना के समय पहने गए कपड़े और कैप, ट्रेन टिकट और यात्रा से जुड़े अन्य दस्तावेज शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी रामप्रसाद दास बर्दवान में सैनिटरी सामान की दुकान चलाता है और दसवीं तक शिक्षित है। उसकी पत्नी बनश्री दास स्नातक शिक्षित गृहिणी है। प्रारंभिक जांच में महिला के खिलाफ किसी पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं मिली है।
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त Rajeev Kumar ने बताया कि हत्या की साजिश, वारदात में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और नाबालिग की संलिप्तता समेत सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि यह मामला दर्शाता है कि पारिवारिक और संपत्ति विवाद किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं।
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