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LNJP Hospital: लोकनायक अस्पताल में मरीज को एमआरआई के लिए मिली 2029 की तारीख

LNJP Hospital: लोकनायक अस्पताल में मरीज को एमआरआई के लिए मिली 2029 की तारीख

राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल लोकनायक (एलएनजेपी) अस्पताल में एमआरआई जांच के लिए करीब तीन साल की लंबी प्रतीक्षा सामने आने से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कमर और रीढ़ की असहनीय पीड़ा से जूझ रहे 27 वर्षीय बेघर युवक को डॉक्टर ने तत्काल एमआरआई कराने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग ने उसे 23 अप्रैल 2029 की तारीख दे दी। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होने के कारण मरीज निजी केंद्र पर हजारों रुपये खर्च कर जांच कराने में भी असमर्थ है।

जानकारी के अनुसार अमित नाम का युवक पहले मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता था, लेकिन लगातार बढ़ते कमर और रीढ़ के दर्द के कारण अब उसके लिए खड़ा होना भी मुश्किल हो गया है। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द एमआरआई कराने की सलाह दी थी, ताकि बीमारी की सही पहचान कर इलाज शुरू किया जा सके। हालांकि अस्पताल में लंबी वेटिंग के चलते उसे वर्ष 2029 की तारीख मिल गई।

अमित का कहना है कि उसके पास निजी लैब में पांच से सात हजार रुपये खर्च कर एमआरआई कराने के पैसे नहीं हैं। उसने भावुक होकर कहा कि “2029 तक जिंदा रहूंगा या नहीं, पता नहीं।” उसकी यह पीड़ा उन हजारों गरीब मरीजों की स्थिति को भी उजागर करती है जो आर्थिक तंगी के कारण निजी अस्पतालों का रुख नहीं कर पाते।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रीढ़ की हड्डी और नसों से जुड़ी बीमारियों में समय पर एमआरआई जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। जांच में अधिक देरी होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और उपचार का असर भी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में सीमित एमआरआई मशीनें, मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और दूसरे अस्पतालों से आने वाले रेफरल मामलों के कारण दबाव लगातार बढ़ रहा है।

इस मामले में लोकनायक अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ओमप्रकाश ने बताया कि आर्थिक रूप से जरूरतमंद मरीजों के लिए दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) के तहत घर के नजदीक स्थित निजी लैब में निशुल्क एमआरआई कराने की सुविधा उपलब्ध है। इसके लिए मरीज को आवेदन करना होता है, जिसे आमतौर पर एक से तीन दिन के भीतर मंजूरी मिल जाती है। इसके बाद मरीज को लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती और वह बिना किसी अतिरिक्त खर्च के निजी लैब में जांच करा सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में आधुनिक जांच सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने और एमआरआई मशीनों की संख्या में इजाफा करने की आवश्यकता को सामने ला दिया है, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

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