Delhi Protest: घायलों के इलाज ने खड़े किए नए सवाल, प्रदर्शन में पैलेट गन चली?

Delhi Protest: घायलों के इलाज ने खड़े किए नए सवाल, प्रदर्शन में पैलेट गन चली?
दिल्ली में हालिया प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लोगों के इलाज के दौरान सामने आए चिकित्सकीय निष्कर्षों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। राजधानी के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भर्ती कई प्रदर्शनकारियों के शरीर से सर्जरी के दौरान छर्रे (पैलेट) निकाले गए हैं, जबकि कई मरीजों की आंख, कान, गर्दन और कंधे जैसे संवेदनशील अंगों पर गंभीर चोटें दर्ज की गई हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद यह सवाल तेज हो गया है कि क्या भीड़ नियंत्रण के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, इस संबंध में अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार कई घायलों को नेत्र रोग, ईएनटी (कान, नाक और गला) तथा सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। चिकित्सकों का कहना है कि उच्च वेग (हाई-वेलोसिटी) वाले छर्रों से लगने वाली चोटें आंखों, कानों और नसों जैसे संवेदनशील अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार और लगातार फॉलो-अप बेहद आवश्यक होता है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुचेता कृपलानी अस्पताल में भर्ती करीब 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूर के शरीर से सर्जरी के दौरान 40 से अधिक छर्रे निकाले गए। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उसके कान, गले और कंधे के आसपास गंभीर चोटें थीं, जिसके चलते उसे ईएनटी विभाग में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की चोटों में संक्रमण, सुनने की क्षमता प्रभावित होने और नसों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है, इसलिए मरीज की लगातार निगरानी जरूरी है।
इसी अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद 20 वर्षीय साहिल को आंख में गंभीर चोट के कारण अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर (आरपी सेंटर) रेफर किया गया। वहां ट्रॉमा सेंटर में उसका इलाज किया गया और उपचार के बाद शुक्रवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक साहिल की दाहिनी आंख के पास गंभीर चोट लगी थी, जिससे उसकी दृष्टि प्रभावित हुई। नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की आंखों की चोटों में तत्काल जांच और उपचार बेहद जरूरी होता है, ताकि स्थायी दृष्टि हानि के खतरे को कम किया जा सके।
वहीं सफदरजंग अस्पताल में कई चोटों के साथ पहुंचे 28 वर्षीय विकास पटवाल का उपचार करने के बाद उन्हें उसी दिन छुट्टी दे दी गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और उन्हें अगले दिन सर्जरी ओपीडी में फॉलो-अप के लिए बुलाया गया है।
इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान घायल हुई 21 वर्षीय एक युवती अभी भी डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल के अनुसार उसकी हालत स्थिर बनी हुई है और डॉक्टर लगातार उसकी निगरानी कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आंख, कान, गर्दन और अन्य संवेदनशील अंगों पर लगी गंभीर चोटों के मामलों में विशेषज्ञ उपचार और नियमित फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक होता है। वहीं मरीजों के शरीर से मिले छर्रों की प्रकृति और चोटों के वास्तविक कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों और सक्षम अधिकारियों की आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।





