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IVF Day: देश में लगातार बढ़ रही IVF की जरूरत, समय रहते संभलने की सलाह

IVF Day: देश में लगातार बढ़ रही IVF की जरूरत, समय रहते संभलने की सलाह

बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, देर से शादी और परिवार शुरू करने की बदलती सामाजिक प्रवृत्ति के कारण देश में बांझपन (इन्फर्टिलिटी) के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आज लगभग हर छह में से एक व्यक्ति को जीवन के किसी न किसी चरण में प्रजनन संबंधी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) आधुनिक चिकित्सा का एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है।

विश्व आईवीएफ दिवस (25 जुलाई) की पूर्व संध्या पर विशेषज्ञों ने लोगों से समय रहते जागरूक होने और जरूरत पड़ने पर बिना देरी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने की अपील की। सुचेता कृपलानी अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पिकी सक्सेना ने बताया कि महिलाओं में पीसीओएस, एंडोमेट्रियोसिस, फैलोपियन ट्यूब का बंद होना और बढ़ती उम्र, जबकि पुरुषों में शुक्राणुओं की संख्या या गुणवत्ता में कमी आईवीएफ की जरूरत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।

उन्होंने बताया कि 35 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को यदि छह महीने तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं होता और 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को एक वर्ष तक सफलता नहीं मिलती, तो उन्हें तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से गर्भधारण की संभावना काफी बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आईवीएफ के लिए महिलाओं की सबसे उपयुक्त आयु सामान्यतः 25 से 35 वर्ष मानी जाती है। 35 वर्ष के बाद अंडों की गुणवत्ता और संख्या तेजी से कम होने लगती है, जिससे सफलता की संभावना भी घटती जाती है। हालांकि आधुनिक तकनीकों और उचित उपचार से अधिक उम्र में भी आईवीएफ सफल हो सकता है।

डॉ. पिकी सक्सेना ने महिलाओं को स्वस्थ वजन बनाए रखने, संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाने तथा तनाव कम रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म में अनियमितता, बार-बार गर्भपात या अन्य स्त्री रोग संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर इलाज से कई मामलों में आईवीएफ की आवश्यकता भी टाली जा सकती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि महिलाओं में अंडों की संख्या जन्म से ही निर्धारित होती है। जन्म के समय लगभग 10 से 20 लाख अंडे होते हैं, लेकिन पूरे प्रजनन काल में केवल 400 से 500 अंडे ही परिपक्व हो पाते हैं। वहीं पुरुषों में किशोरावस्था के बाद जीवनभर शुक्राणु बनते रहते हैं, हालांकि उम्र बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता और संख्या प्रभावित हो सकती है।

विश्व आईवीएफ दिवस की पूर्व संध्या पर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें 100 से अधिक महिलाओं को आईवीएफ तकनीक, प्रजनन स्वास्थ्य और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि 25 जुलाई 1978 को दुनिया का पहला आईवीएफ बेबी लुईस ब्राउन जन्मा था, जिसकी याद में हर वर्ष विश्व आईवीएफ दिवस मनाया जाता है।

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