दिल्ली

Nicotine Pouches: निकोटिन पाउच बन रहे युवाओं की नई लत, फ्लेवर और स्मोक-फ्री दावों के जरिए बढ़ रहा खतरा

Nicotine Pouches:  निकोटिन पाउच बन रहे युवाओं की नई लत, फ्लेवर और स्मोक-फ्री दावों के जरिए बढ़ रहा खतरा

नई दिल्ली, 11 जून। देश में युवाओं के बीच निकोटिन की लत का एक नया और चिंताजनक रूप तेजी से फैल रहा है। आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर) के हालिया अध्ययन में खुलासा हुआ है कि निकोटिन पाउच नामक उत्पाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, हुक्का शॉप्स और क्विक डिलीवरी ऐप्स के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक पैकेजिंग और ‘स्मोक-फ्री’ विकल्प के रूप में प्रचारित किए जाने के कारण बड़ी संख्या में युवा इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।

अध्ययन के अनुसार देश के 10 प्रमुख शहरों में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि सात शहरों में निकोटिन पाउच खुलेआम बेचे जा रहे हैं। जांच के दौरान 68 विभिन्न ब्रांड और 445 प्रकार के फ्लेवर की पहचान की गई। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि कुछ उत्पादों में प्रति पाउच 120 मिलीग्राम तक निकोटिन पाया गया, जो अत्यधिक उच्च मात्रा मानी जाती है और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।

एनआईसीपीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण में शामिल लगभग 9 प्रतिशत बिक्री केंद्रों पर निकोटिन पाउच उपलब्ध थे। अधिकांश विक्रेताओं ने स्वीकार किया कि इनके प्रमुख ग्राहक 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा और कामकाजी पुरुष हैं। कई लोग इन्हें सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के तथाकथित ‘सुरक्षित’ और ‘ट्रेंडी’ विकल्प के रूप में उपयोग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार निकोटिन पाउच का इस्तेमाल बेहद आसान होता है। इन्हें दांतों और होंठों के बीच रखकर उपयोग किया जाता है, जिससे निकोटिन सीधे मुंह की झिल्ली के माध्यम से शरीर में अवशोषित हो जाती है। यह प्रक्रिया निकोटिन को तेजी से रक्त प्रवाह तक पहुंचाती है और व्यक्ति में निर्भरता तथा लत विकसित होने का खतरा बढ़ा देती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निकोटिन पाउच का नियमित सेवन हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, स्ट्रोक, अनियमित हृदय गति, मसूड़ों की बीमारी और दांतों की सड़न जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। निकोटिन की अधिक मात्रा अवसाद, चिंता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और व्यवहार संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है।

एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने कहा कि निकोटिन ही तंबाकू महामारी की मूल वजह है। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक तंबाकू उत्पादों पर नियंत्रण पर्याप्त नहीं है, बल्कि निकोटिन आधारित नए उत्पादों और उनके आधुनिक स्वरूपों पर भी प्रभावी नियमन और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि समय रहते इन उत्पादों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो युवाओं में निकोटिन की लत एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।

क्या हैं निकोटिन पाउच?

निकोटिन पाउच छोटे, सफेद और धुआं-रहित पैकेट होते हैं, जिनमें निकोटिन, विभिन्न फ्लेवर और पौधों से प्राप्त फाइबर सामग्री शामिल होती है। इनमें प्रयुक्त निकोटिन या तो सिंथेटिक रूप से तैयार की जाती है या तंबाकू के पौधों से निकाली जाती है। इन्हें तंबाकू-मुक्त और सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक बताकर बाजार में प्रचारित किया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस दावे को भ्रामक मानते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार किशोरों और युवाओं में निकोटिन का सेवन मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकता है। इससे सीखने की क्षमता, ध्यान केंद्रित करने की योग्यता, निर्णय लेने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों और स्वास्थ्य एजेंसियों को इस बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं से अपील की है कि वे आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक पैकेजिंग और भ्रामक विज्ञापनों के प्रभाव में आकर निकोटिन पाउच का उपयोग न करें तथा किसी भी प्रकार के निकोटिन उत्पाद से दूरी बनाए रखें।

Related Articles

Back to top button