Mental Health Crisis: डॉक्टरों की कमी से देश में मानसिक इलाज चुनौती, एक लाख आबादी पर सिर्फ 0.75 मनोचिकित्सक
नई दिल्ली। देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होने के बावजूद मरीजों की संख्या के मुकाबले प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मानसिक बीमारी से जूझ रहे मरीजों को केवल अस्पताल या हेल्पलाइन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके इलाज के लिए पर्याप्त संख्या में मनोचिकित्सकों, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोरोग नर्सों और अन्य प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत होती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (इहबास), दिल्ली के मनोचिकित्सा एवं जेरियाट्रिक मेंटल हेल्थ विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. ओमप्रकाश ने ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अपनी रैपिड रिस्पॉन्स में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने इंग्लैंड में प्रस्तावित मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के संदर्भ में बताया कि नए केंद्र तभी प्रभावी हो सकते हैं, जब उनके साथ पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी भी उपलब्ध हों।
एक लाख लोगों पर सिर्फ 0.75 मनोचिकित्सक
डॉ. ओमप्रकाश के अनुसार, भारत में करीब एक लाख आबादी पर केवल 0.75 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। इसके अलावा क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोरोग नर्स, सोशल वर्कर और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भी भारी कमी है। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कई बीमारियों में लंबे समय तक उपचार और नियमित निगरानी की जरूरत होती है। मरीजों को दवाओं के साथ काउंसलिंग, डॉक्टर की नियमित निगरानी और फॉलो-अप की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में विशेषज्ञों की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने पर मरीजों को समय पर उपचार मिलना मुश्किल हो सकता है।
एक हजार से ज्यादा मरीजों के लिए सिर्फ तीन मनोचिकित्सक
रैपिड रिस्पॉन्स में महाराष्ट्र के येरवडा स्थित रीजनल मेंटल हॉस्पिटल का उदाहरण भी दिया गया है। फरवरी 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, वहां एक हजार से अधिक भर्ती मरीजों के लिए केवल तीन मनोचिकित्सक उपलब्ध थे। यह स्थिति बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में चुनौती केवल अस्पतालों और संस्थानों की संख्या बढ़ाने की नहीं है, बल्कि वहां पर्याप्त विशेषज्ञ स्टाफ उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध विशेषज्ञों के बीच बड़ा अंतर होने से डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर भी काम का दबाव बढ़ता है। इससे मरीजों की नियमित निगरानी और व्यक्तिगत उपचार की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
42 लाख से ज्यादा लोगों ने टेली-मानस से मांगी मदद
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए भारत में टेली-मानस सेवा भी संचालित की जा रही है। अगस्त 2026 तक इस सेवा पर 42 लाख से ज्यादा कॉल आ चुके थे। देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 53 टेली-मानस सेल काम कर रहे हैं और 20 भाषाओं में सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
टेली-मानस ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता हासिल करने के लिए शुरुआती संपर्क को आसान बनाया है। जिन लोगों को मानसिक तनाव, चिंता या अन्य परेशानियों के संबंध में मार्गदर्शन चाहिए, वे इस तरह की डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से शुरुआती सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल हेल्थ सेवाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों और अस्पतालों की जरूरत को खत्म नहीं कर सकतीं। गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए व्यक्तिगत चिकित्सकीय मूल्यांकन और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता बनी रहती है।
गंभीर मरीजों को आमने-सामने विशेषज्ञ उपचार जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर अवसाद, आत्महत्या के जोखिम, मनोविकृति, लंबे समय से चली आ रही मानसिक बीमारी या ऐसे मामलों में जहां दवा और अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत हो, मरीज को आमने-सामने विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में केवल फोन या डिजिटल माध्यम से दी गई सलाह पर्याप्त नहीं हो सकती।
इसलिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए टेली-मानस जैसी डिजिटल सुविधाओं के साथ अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। मनोचिकित्सकों के साथ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोरोग नर्सों, सोशल वर्कर्स और अन्य प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए विशेषज्ञों की कमी दूर करना स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने एक महत्वपूर्ण चुनौती है। डिजिटल सेवाएं शुरुआती सहायता और लोगों तक पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन व्यापक मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन और मजबूत अस्पताल नेटवर्क भी जरूरी है।



