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ICMR Labs: 83 जगहों पर खुलीं ICMR की लैब, वैज्ञानिक बनेंगे स्कूली बच्चे, 30 हजार छात्र देखेंगे लाइव रिसर्च

ICMR Labs: 83 जगहों पर खुलीं ICMR की लैब, वैज्ञानिक बनेंगे स्कूली बच्चे, 30 हजार छात्र देखेंगे लाइव रिसर्च

नई दिल्ली। विज्ञान को किताबों और कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर छात्रों को वास्तविक शोध और प्रयोगशाला की दुनिया से जोड़ने के लिए डीएचआर-आईसीएमआर का शाइन 2026 कार्यक्रम मंगलवार से शुरू हो गया। 11 और 12 अगस्त को आयोजित हो रहे इस कार्यक्रम के तहत देशभर में 83 स्थानों पर प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों में स्कूली छात्रों को वैज्ञानिक गतिविधियों से रूबरू कराया जा रहा है। इस पहल से करीब 30 हजार छात्रों के जुड़ने की उम्मीद है।

कार्यक्रम में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को स्वास्थ्य अनुसंधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है। छात्र प्रयोगशालाओं का दौरा कर रहे हैं और वैज्ञानिकों द्वारा किए जा रहे शोध एवं प्रयोगों को प्रत्यक्ष रूप से देख रहे हैं। लाइव वैज्ञानिक प्रदर्शन के माध्यम से उन्हें यह समझने का अवसर दिया जा रहा है कि प्रयोगशाला में किसी शोध को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।

शाइन 2026 के दौरान छात्रों के लिए रिसर्च प्रदर्शनियां भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें स्वास्थ्य और चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े विषयों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकें। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आईसीएमआर के वैज्ञानिकों के साथ छात्रों का सीधा संवाद भी है।

छात्र वैज्ञानिकों से अपने सवाल पूछकर शोध की बारीकियों को समझ रहे हैं। उन्हें प्रयोगों, वैज्ञानिक सोच और स्वास्थ्य अनुसंधान में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों के बारे में जानकारी दी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें भविष्य में शोध एवं वैज्ञानिक क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना है।

आईसीएमआर की ओर से छात्रों को जिज्ञासु बने रहने और सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। डॉ. राजीव बहल ने विद्यार्थियों से कहा कि वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए सवाल पूछना और चीजों को समझने की कोशिश करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, छात्रों में मौजूद जिज्ञासा को सही दिशा देकर भविष्य के वैज्ञानिक तैयार किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम के तहत आईसीएमआर ने शाइन की वेबसाइट भी शुरू की है, ताकि छात्रों और अन्य प्रतिभागियों को कार्यक्रम से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य शोध प्रतियोगिता की घोषणा भी की गई है।

आईसीएमआर की यह पहल स्कूली विद्यार्थियों को स्वास्थ्य अनुसंधान की वास्तविक प्रक्रिया से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रयोगशालाओं में जाकर शोधकर्ताओं के काम को प्रत्यक्ष रूप से देखने और वैज्ञानिकों से बातचीत करने से छात्रों को विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष को समझने का अवसर मिल रहा है।

शाइन 2026 के जरिए देशभर के हजारों विद्यार्थियों को यह अनुभव कराया जा रहा है कि विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि लगातार प्रयोग, सवाल, शोध और नए समाधान खोजने की प्रक्रिया भी है। इस तरह की पहल भविष्य में स्वास्थ्य अनुसंधान और वैज्ञानिक क्षेत्रों में नई प्रतिभाओं को आकर्षित करने में मददगार साबित हो सकती है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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