Preventive Healthcare: इलाज के साथ बीमारी से बचाव जरूरी, योग-प्राकृतिक चिकित्सा को वैज्ञानिक शोध से जोड़ने पर जोर
नई दिल्ली। बीमारी का इलाज करने के साथ उससे बचाव और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना भी जरूरी है। आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, तनाव प्रबंधन, पुनर्वास और स्वस्थ वृद्धावस्था से जोड़ने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रतापराव जाधव ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने इन पद्धतियों की शिक्षा, शोध, प्रमाणन और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने की जरूरत बताई।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा को केवल उपचार की पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इनके माध्यम से बीमारी की रोकथाम, तनाव प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि, मानसिक संतुलन और स्वस्थ दिनचर्या को निवारक स्वास्थ्य देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
प्रतापराव जाधव ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक वैज्ञानिक शोध और प्रमाणों के साथ जोड़ना जरूरी है। इसके लिए योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के साथ उनके परिणामों को व्यवस्थित तरीके से सामने लाने की आवश्यकता है।
बैठक में शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों और समिति के सदस्यों ने माना कि योग और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने से इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है।
प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना भी बैठक में महत्वपूर्ण विषय रहा। इसका उद्देश्य लोगों तक बेहतर और विश्वसनीय सेवाएं पहुंचाना है, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल उचित प्रशिक्षण और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा सके।
समुदाय स्तर तक योग और प्राकृतिक चिकित्सा की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इससे लोगों को अपने दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने और बीमारी की रोकथाम के प्रति जागरूक होने में मदद मिल सकती है।
संसदीय परामर्शदात्री समिति ने योग और प्राकृतिक चिकित्सा की शिक्षा के लिए एकीकृत नियामक व्यवस्था की आवश्यकता पर भी सहमति जताई। इसके माध्यम से शिक्षा और प्रशिक्षण से जुड़े मानकों में एकरूपता लाने तथा इन पद्धतियों को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
बैठक में इस बात पर भी जोर रहा कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विकास के लिए शोध और वैज्ञानिक प्रमाणों को आधार बनाया जाना चाहिए। इससे योग और प्राकृतिक चिकित्सा के संभावित लाभों को बेहतर तरीके से समझने और उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था में उपयुक्त स्थान देने में मदद मिल सकती है।



