India Service Export Growth: क्लाउड सर्विस, AI और डिजिटल सेवाओं के दम पर भारत का सर्विस निर्यात 400 अरब डॉलर के पार
भारत के सर्विस सेक्टर ने वैश्विक स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार देश का सर्विस निर्यात 400 अरब डॉलर के आंकड़े को पार करते हुए 418 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले 11 वर्षों में भारत के सर्विस सेक्टर निर्यात में दोगुना से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है।
वित्त वर्ष 2014-15 में भारत का सर्विस निर्यात केवल 158 अरब डॉलर था, लेकिन अब यह तेजी से बढ़कर 418 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में सर्विस निर्यात का आंकड़ा वस्तु निर्यात को भी पीछे छोड़ सकता है। वर्तमान में देश के कुल निर्यात में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत के करीब पहुंच रही है, जबकि 11 साल पहले यह करीब 33 प्रतिशत थी।
भारत के सर्विस सेक्टर की इस तेज प्रगति के पीछे क्लाउड सर्विस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल सेवाएं, साइबर सुरक्षा और आईटी सेवाओं की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती मांग का भारत को बड़ा फायदा मिल रहा है। भारतीय कंपनियां अब दुनिया भर में तकनीकी सेवाएं और डिजिटल समाधान उपलब्ध करा रही हैं।
सरकार ने वर्ष 2047 तक वैश्विक सर्विस निर्यात में भारत की हिस्सेदारी को 10 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल वैश्विक सर्विस निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 4.3 प्रतिशत है। माना जा रहा है कि यदि इसी गति से वृद्धि जारी रही तो भारत दुनिया के सबसे बड़े सर्विस निर्यातक देशों में शामिल हो सकता है।
सर्विस निर्यात बढ़ने से देश की जीडीपी में भी सर्विस सेक्टर का योगदान लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में भारत की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 53.6 प्रतिशत है। तुलना करें तो अमेरिका में यह हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक और चीन में 60 प्रतिशत से ज्यादा है। ऐसे में सरकार अब सर्विस सेक्टर को भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनाने की दिशा में काम कर रही है।
सरकार की ओर से केयर सेक्टर, आयुष, आयुर्वेद और मेडिकल टूरिज्म जैसे क्षेत्रों को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा एआई सर्विस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म सेवाओं के लिए नया इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है ताकि भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सके।
वर्तमान में भारत सबसे ज्यादा सर्विस निर्यात आईटी सेक्टर में करता है। इसके बाद वित्तीय सेवाएं और विभिन्न क्षेत्रों में कंसल्टेंसी सेवाएं प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित देशों के साथ हो रहे मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA भारत के सर्विस सेक्टर को और अधिक मजबूती देंगे।
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते में सर्विस सेक्टर के 137 सब-सेक्टर शामिल किए गए हैं। जुलाई से लागू होने वाले इस समझौते से भारतीय कंपनियों और प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में नए अवसर मिलेंगे। इसी तरह न्यूजीलैंड के साथ हुए समझौते में 118 प्रकार की सेवाओं को शामिल किया गया है।
इसके अलावा ओमान के साथ होने वाला व्यापार समझौता अगले महीने से लागू हो सकता है, जिससे 127 सर्विस सेक्टर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खुल जाएंगे। वहीं अगले साल की शुरुआत तक यूरोपीय यूनियन के साथ भी भारत का व्यापार समझौता लागू होने की संभावना है। इससे सर्विस सेक्टर के 144 क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत इसी तरह तकनीक, डिजिटल सेवाओं और प्रोफेशनल स्किल्स पर फोकस बनाए रखता है तो आने वाले वर्षों में सर्विस सेक्टर देश की आर्थिक ताकत को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है।


