PM Surakshit Matritva Abhiyan: सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि, पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे

PM Surakshit Matritva Abhiyan: सुरक्षित मातृत्व की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि, पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे

नई दिल्ली, 8 जून। गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने अपने सफल दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 9 जून से देशभर में ’10 इयर्स ऑफ पीएमएसएमए – ए डिकेड ऑफ केयर’ राष्ट्रीय समारोह का आयोजन करेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा राष्ट्रीय स्तर पर इस विशेष अभियान का शुभारंभ करेंगे। मंत्रालय के अनुसार, इस अवसर पर देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत उपलब्ध नौ सुनिश्चित निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देना तथा नियमित और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) के महत्व के प्रति जागरूक बनाना है। इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा 75 रुपये का स्मारक सिक्का और 5 रुपये का विशेष डाक टिकट भी जारी करेंगे। ये दोनों प्रतीक मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में अभियान के दस वर्षों के योगदान को समर्पित होंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि यह अभियान देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने में सफल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 जून 2016 को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत प्रत्येक माह की 9 तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श सेवाएं प्रदान की जाती हैं। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है। पिछले एक दशक में यह अभियान प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (आरएमएनसीएच+ए) रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस पहल ने प्रसवपूर्व देखभाल की गुणवत्ता में सुधार किया है, जांच सुविधाओं की पहुंच बढ़ाई है और स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया है। इसके साथ ही मातृ मृत्यु दर और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं को कम करने में भी अभियान ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान ने देश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने, गर्भवती महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दस वर्षों की इस यात्रा ने लाखों महिलाओं और नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाई है तथा भविष्य में भी यह अभियान मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मजबूत आधार स्तंभ बना रहेगा।

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