Indian Pharmacopoeia 2026: दवाओं की गुणवत्ता और मरीज सुरक्षा पर वैज्ञानिकों का मंथन, भारतीय फार्माकोपिया 2026 पर हुआ राष्ट्रीय सम्मेलन

Indian Pharmacopoeia 2026: दवाओं की गुणवत्ता और मरीज सुरक्षा पर वैज्ञानिकों का मंथन, भारतीय फार्माकोपिया 2026 पर हुआ राष्ट्रीय सम्मेलन
नई दिल्ली, 15 मई : दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Indian Pharmacopoeia Commission द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक सम्मेलन और इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम National Institute of Pharmaceutical Education and Research Hyderabad में आयोजित हुआ, जिसमें ‘भारतीय फार्माकोपिया 2026’ को केंद्र में रखते हुए दवाओं में अशुद्धियों की पहचान और नियंत्रण पर विस्तृत चर्चा की गई।
सम्मेलन का मुख्य विषय था — “दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में इंडियन फार्माकोपिया रेफरेंस स्टैंडर्ड्स और इंप्योरिटी स्टैंडर्ड्स का महत्व।” कार्यक्रम में Central Drugs Standard Control Organization, अकादमिक संस्थानों, चिकित्सकों और दवा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने दवाओं में मौजूद अशुद्धियों के प्रभाव, उनकी वैज्ञानिक जांच और मरीजों की सुरक्षा को लेकर विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक V. Kalaiselvan ने कहा कि दवाओं में अशुद्धियों की वैज्ञानिक पहचान और उनका प्रभावी नियंत्रण मरीजों में होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूत और विश्वसनीय फार्माकोपियल मानक देश में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
वहीं Shailendra Saraf ने इस सम्मेलन को गुणवत्ता सुधार और क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक मंच दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद करते हैं।
सम्मेलन की खास बात यह रही कि पहली बार गुणवत्ता विशेषज्ञों, नियामक अधिकारियों और क्लिनिकल विशेषज्ञों ने एक साथ बैठकर दवा अशुद्धियों के मरीजों की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने माना कि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक वैज्ञानिक मानकों और कड़े परीक्षणों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह आयोजन देश में दवाओं की गुणवत्ता सुधारने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





