BRICS AYUSH: पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों की बड़ी पहल, टीसीआईएम के लिए बनेगा एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप
पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में ब्रिक्स देशों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में आयोजित ब्रिक्स पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) बैठक में सदस्य देशों ने सहयोग बढ़ाने और संयुक्त शोध को गति देने के लिए एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के गठन पर सहमति जताई। इस पहल को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
बैठक में भारत के अलावा ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयुष मंत्रालय ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष ‘आयुष जोन’ तैयार किया, जहां उन्होंने आयुष आहार, योग, वेलनेस गतिविधियों, स्वास्थ्य परामर्श और भारत की समृद्ध हर्बल विरासत का अनुभव किया।
बैठक के दौरान पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध, शिक्षा, मानव संसाधन विकास और नियामकीय सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि साक्ष्य आधारित पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने से लोगों को सुरक्षित और प्रभावी उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
भारत ने इस अवसर पर अपनी समृद्ध आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और औषधीय पौधों की विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप बनने से सदस्य देशों के बीच ज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी तथा पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर खुलेंगे।



