Kalraj Mishra UGC: कलराज मिश्रा का UGC नियमों पर विरोध, कहा “न्याय और सामाजिक समरसता के खिलाफ”

Kalraj Mishra UGC: कलराज मिश्रा का UGC नियमों पर विरोध, कहा “न्याय और सामाजिक समरसता के खिलाफ”
नोएडा। विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्रा ने बुधवार को UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि यह नियम समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के बजाय विभाजनकारी और पक्षपातपूर्ण हैं।
कलराज मिश्रा ने स्पष्ट किया कि “शिक्षण संस्थानों में सभी छात्रों के लिए समान अवसर और निष्पक्षता होना आवश्यक है। लेकिन किसी विशेष वर्ग को हमेशा संदेह के घेरे में रखकर उनके विरुद्ध निगरानी और अनुशासनात्मक टीम गठित करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी घातक है।” उन्होंने याद दिलाया कि UGC द्वारा 2012 में बनाए गए नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान और निष्पक्ष थी, जिसमें किसी भी छात्र को पूर्वाग्रह के आधार पर अपराधी मानने की प्रवृत्ति नहीं थी।
पंडित मिश्रा ने कहा कि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक निर्णय का भी उल्लेख किया, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि किसी भी जांच में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से निर्दोष व्यक्तियों के अधिकार और गरिमा की रक्षा करना न्याय का अनिवार्य हिस्सा है।
परिषद के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, “विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद का मूल उद्देश्य ब्राह्मण समाज को धुरी बनाकर समाज में सामाजिक समरसता स्थापित करना है, जबकि UGC के ये नए नियम समाज में विभाजन और असमानता पैदा करते हैं।”
कलराज मिश्रा ने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी नागरिकों को समानता और सम्मान की गारंटी देते हैं, और प्रस्तावित UGC विनियम सीधे तौर पर इन अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने मांग की कि इन नियमों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए और जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधान पूरी तरह हटा दिए जाएँ।
उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। झूठी शिकायत करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध सजा का प्रावधान होना चाहिए और समिति में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पंडित मिश्रा का यह बयान शिक्षाविदों, छात्रों और समाज के सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है कि शिक्षा में न्याय और समानता सुनिश्चित करना हर स्तर पर प्राथमिकता होनी चाहिए।
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