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Delhi: दस्तावेजों की कमी अब नहीं रोकेगी बच्चों की पढ़ाई, झुग्गी बस्तियों के 116 बच्चों को स्कूल से जोड़ने की पहल

Delhi: दस्तावेजों की कमी अब नहीं रोकेगी बच्चों की पढ़ाई, झुग्गी बस्तियों के 116 बच्चों को स्कूल से जोड़ने की पहल

New Delhi में शिक्षा से वंचित बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर पूर्वी जिला विकास समिति ने सराहनीय पहल शुरू की है। ‘आओ स्कूल चले हम’ अभियान के तहत रोहतास नगर विधानसभा क्षेत्र की मूर्तिकार बस्ती, अशोक नगर और लाल बाग झुग्गी बस्ती में विशेष शिविर आयोजित कर उन बच्चों की पहचान की गई, जो केवल जरूरी दस्तावेजों के अभाव में स्कूल नहीं जा पा रहे थे।

अभियान के दौरान कुल 116 ऐसे बच्चों की पहचान हुई जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं था। जन्म प्रमाणपत्र न होने की वजह से उनका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा था, जबकि स्कूल में प्रवेश के लिए आधार कार्ड अनिवार्य माना जाता है। शिविर में मौजूद अधिकारियों की मदद से मौके पर ही आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

Jitendra Mahajan ने बताया कि उत्तर पूर्वी जिला विकास समिति भविष्य में भी झुग्गी और स्लम बस्तियों में इसी तरह के शिविर आयोजित करती रहेगी ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ दस्तावेज बनवाना नहीं, बल्कि उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना है जिनके सपने परिस्थितियों की वजह से अधूरे रह जाते हैं।

शिविर के दौरान बच्चों के अभिभावकों की काउंसलिंग भी की गई और उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। कई अभिभावकों ने बताया कि दस्तावेजों की कमी के कारण वे अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं करा पा रहे थे। अब इस पहल से उनके बच्चों को पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।

बच्चों के चेहरों पर पढ़ाई और आगे बढ़ने का उत्साह साफ दिखाई दिया। कई बच्चों ने समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य बनाने की इच्छा जताई। आयोजन में शाहदरा तहसीलदार और उनकी टीम ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया को आसान बनाने में सहयोग किया।

समिति के सदस्यों का कहना है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी बच्चे की पढ़ाई केवल दस्तावेजों की कमी के कारण नहीं रुकनी चाहिए। इस अभियान को स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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