AIIMS Delhi: एम्स दिल्ली की बड़ी उपलब्धि, टेढ़ी रीढ़ वाले बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी की उम्मीद

AIIMS Delhi: एम्स दिल्ली की बड़ी उपलब्धि, टेढ़ी रीढ़ वाले बच्चों को मिलेगी नई जिंदगी की उम्मीद
All India Institute of Medical Sciences Delhi के विशेषज्ञों ने गंभीर स्कोलियोसिस यानी रीढ़ की गंभीर टेढ़ी समस्या से जूझ रहे बच्चों के इलाज में बड़ी सफलता हासिल की है। आधुनिक तकनीक आधारित विशेष स्पाइन सर्जरी के जरिए अब ऐसे बच्चों को बेहतर और सामान्य जीवन देने की नई उम्मीद जगी है। यह उपलब्धि न केवल भारत बल्कि दुनियाभर के स्पाइन सर्जनों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Dr. Bhavuk Garg के नेतृत्व में किए गए इस शोध में जटिल बाल स्पाइन सर्जरी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, व्यावहारिक अनुभवों और बेहतर उपचार रणनीतियों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है। शोध के अनुसार नई तकनीकों की मदद से रीढ़ को अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीके से सीधा किया जा सकता है। इससे बच्चों के छाती और फेफड़ों के विकास को बेहतर समर्थन मिलेगा और बार-बार सर्जरी की जरूरत भी कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से ऑपरेशन और एनेस्थीसिया से जुड़े जोखिमों में कमी आने की संभावना है। साथ ही सर्जरी के बाद बच्चों की जीवन गुणवत्ता, संतुलन, सांस लेने की क्षमता और चलने-फिरने में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। शोध में यह भी बताया गया है कि गंभीर रीढ़ विकार वाले बच्चों को केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है।
यह शोध Indian Spine Journal में प्रकाशित हुआ है। इसे खास तौर पर उन बच्चों के लिए अहम माना जा रहा है जिनकी रीढ़ कम उम्र में असामान्य रूप से मुड़ने लगती है। ऐसी स्थिति अक्सर Cerebral Palsy, Spinal Muscular Atrophy और अन्य न्यूरोमस्कुलर बीमारियों से पीड़ित बच्चों में देखने को मिलती है।
डॉ. भावुक गर्ग के अनुसार स्पाइन सर्जरी का उद्देश्य केवल रीढ़ को सीधा करना नहीं है, बल्कि बच्चों को बेहतर विकास, संतुलित शरीर, आसानी से सांस लेने की क्षमता और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से भविष्य में ऐसे जटिल मामलों का इलाज और अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी बनाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक रीढ़ की गंभीर विकृति के कारण बच्चों को बैठने, खड़े होने और चलने-फिरने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में छाती और फेफड़ों पर दबाव बढ़ने से सांस लेने में परेशानी होने लगती है और बच्चे का शारीरिक विकास भी प्रभावित हो सकता है। इससे पूरे परिवार का दैनिक जीवन चुनौतीपूर्ण बन जाता है।
एम्स दिल्ली की यह उपलब्धि गंभीर रीढ़ विकार से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आई है। साथ ही यह भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता का मजबूत उदाहरण भी माना जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाल स्पाइन सर्जरी के क्षेत्र में नई दिशा देने का काम करेगा।





