Cancer Screening Guidelines India: स्वदेशी गाइडलाइंस से सस्ती और सुलभ होगी जांच

Cancer Screening Guidelines India: स्वदेशी गाइडलाइंस से सस्ती और सुलभ होगी जांच
दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों के बीच भारत में कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज के लिए स्वदेशी गाइडलाइंस बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया है। नई दिल्ली में विशेषज्ञों ने कहा कि भारतीय आबादी की जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य-आधारित गाइडलाइंस तैयार करना समय की मांग है, जिससे समय रहते कैंसर की पहचान और किफायती इलाज संभव हो सके।
दिल्ली राज्य कैंसर चिकित्सा संस्थान (DSCI) की क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि कैंसर स्क्रीनिंग को अब विलासिता नहीं बल्कि एक नियमित स्वास्थ्य जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशों में बनी गाइडलाइंस भारत में पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं, क्योंकि यहां की जीवनशैली, खान-पान और जोखिम कारक अलग हैं। यही वजह है कि भारतीयों में कई बार कैंसर कम उम्र में ही सामने आ जाता है, जिससे समय पर जांच और पहचान बेहद जरूरी हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे विशाल देश में हर जगह महंगे और अत्याधुनिक टेस्ट उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में यदि सरल, किफायती और प्रभावी स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल तैयार किए जाते हैं, तो अनावश्यक जांच को कम किया जा सकता है। इससे मरीजों का आर्थिक बोझ घटेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जांच की सुविधा पहुंच सकेगी।
डॉ. शुक्ला ने बताया कि डीएससीआई की ‘कैप्स – कैंसर जागरूकता और रोकथाम’ पहल इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। इस अभियान के तहत लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक किया जा रहा है और प्रभावित आबादी से जुड़े आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। यह डेटा भविष्य में भारत के लिए विशेष रूप से तैयार की जाने वाली गाइडलाइंस के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
आंकड़ों के मुताबिक भारत में 100 से अधिक प्रकार के कैंसर पाए जाते हैं और हर साल लगभग 15.6 लाख नए मामले सामने आते हैं। वहीं, करीब 8.7 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमित और समय पर स्क्रीनिंग को अपनाया जाए, तो बड़ी संख्या में कैंसर के मामलों को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज आसान और सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता, समय पर जांच और किफायती उपचार ही सबसे प्रभावी हथियार हैं। ऐसे में स्वदेशी गाइडलाइंस तैयार करना भारत के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।





