Artificial Cornea: डोनर नहीं मिले तो आर्टिफिशियल कॉर्निया से रोशनी की उम्मीद
नई दिल्ली। कॉर्निया खराब होने के कारण आंखों की रोशनी गंवा चुके ऐसे मरीजों के लिए आर्टिफिशियल कॉर्निया नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है, जिन्हें डोनर कॉर्निया उपलब्ध नहीं हो पाता या सामान्य कॉर्निया प्रत्यारोपण से पर्याप्त लाभ मिलने की संभावना कम होती है। एम्स दिल्ली के आरपी सेंटर में करीब डेढ़ साल से चुनिंदा मरीजों में आर्टिफिशियल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जा रहा है।
आरपी सेंटर के प्रोफेसर डॉ. राजेश सिन्हा के मुताबिक अब तक करीब 20 मरीजों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा चुका है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल आर्टिफिशियल कॉर्निया हर मरीज के लिए उपयुक्त विकल्प नहीं है। भविष्य में कॉर्निया के अलग-अलग हिस्सों के कृत्रिम विकल्प विकसित होने से ऐसे मरीजों के इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं।
कॉर्निया की जरूरत के मुकाबले डोनर कम
डॉ. सिन्हा के अनुसार देश में कॉर्निया ब्लाइंडनेस से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं। ऐसे मरीजों की दृष्टि वापस लाने के लिए कॉर्निया प्रत्यारोपण प्रमुख उपचारों में शामिल है, लेकिन जरूरत के मुकाबले डोनर कॉर्निया की उपलब्धता काफी कम है।
उनके मुताबिक देश में हर साल करीब दो लाख कॉर्निया की जरूरत होती है, जबकि उपलब्धता जरूरत की करीब 35 प्रतिशत ही है। डोनर कॉर्निया की कमी के कारण बड़ी संख्या में मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
आर्टिफिशियल कॉर्निया विकल्प, डोनेशन बढ़ाना भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल कॉर्निया उन चुनिंदा मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है, जिनमें सामान्य कॉर्निया प्रत्यारोपण संभव नहीं होता या अपेक्षित परिणाम मिलने की संभावना कम होती है। हालांकि डोनर कॉर्निया की कमी दूर करने के लिए लोगों में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
डॉ. सिन्हा के अनुसार मृत्यु के बाद स्वस्थ कॉर्निया का दान कर जरूरतमंद व्यक्ति की आंखों की रोशनी लौटाने में मदद की जा सकती है। इसलिए आर्टिफिशियल कॉर्निया के साथ-साथ कॉर्निया डोनेशन को बढ़ावा देना भी जरूरी है।



