Tribunal Reform: ट्रिब्यूनल होंगे ज्यादा स्वतंत्र और पारदर्शी, नियुक्तियों में न्यायपालिका की बड़ी भूमिका
नई दिल्ली, 12 अगस्त। देश की ट्रिब्यूनल व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से संसद ने ‘ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक, 2026’ पारित किया है। प्रस्तावित व्यवस्था में नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन (एनटीसी) के गठन को प्रमुख बदलाव के रूप में शामिल किया गया है। आयोग में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन ट्रिब्यूनलों में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया को संभालने के साथ उनके कामकाज की निगरानी भी करेगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य नियुक्तियों में कार्यपालिका के सीधे हस्तक्षेप को सीमित करना और चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
16 प्रमुख ट्रिब्यूनल आएंगे दायरे में
विधेयक के तहत 16 प्रमुख ट्रिब्यूनल इसके दायरे में आएंगे। इनमें केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), सशस्त्र बल अधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी), उपभोक्ता आयोग और आयकर अपीलीय अधिकरण सहित प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं।
चयन समितियों की अध्यक्षता न्यायिक सदस्य करेंगे। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भूमिका भी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार को चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सिफारिश प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर नियुक्ति करनी होगी।
डेटा ग्रिड और वित्तीय स्वायत्तता पर भी जोर
विधेयक में नेशनल ट्रिब्यूनल्स डेटा ग्रिड की व्यवस्था का भी प्रावधान है। इसके माध्यम से विभिन्न ट्रिब्यूनलों में चल रहे मामलों से संबंधित जानकारी को एक जगह उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे मामलों की निगरानी और जानकारी तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
इसके साथ ही ट्रिब्यूनलों की वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता बढ़ाने के प्रावधान भी किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य ट्रिब्यूनल व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि मामलों की सुनवाई और प्रशासनिक प्रक्रिया में बेहतर दक्षता सुनिश्चित की जा सके।



