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Women Urologists: महिला यूरोलॉजिस्ट ने रोबोटिक सर्जरी में दिखाया दम, जटिल ऑपरेशनों का लाइव प्रदर्शन कर बढ़ाया आत्मविश्वास

Women Urologists: महिला यूरोलॉजिस्ट ने रोबोटिक सर्जरी में दिखाया दम, जटिल ऑपरेशनों का लाइव प्रदर्शन कर बढ़ाया आत्मविश्वास

नई दिल्ली। चिकित्सा जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का एक और प्रेरणादायक उदाहरण राजधानी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में देखने को मिला, जहां महिला यूरोलॉजिस्ट ने रोबोटिक, लेप्रोस्कोपिक और एंडोयूरोलॉजिकल सर्जरी का सफल लाइव प्रदर्शन किया। इस दौरान कैंसर, प्रोस्टेट, किडनी की पथरी और यूरिनरी इंकॉन्टीनेंस जैसी जटिल बीमारियों के आधुनिक उपचार की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने इसे महिला डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन भविष्य में यूरोलॉजी के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग अस्पताल में आयोजित दो दिवसीय ‘एम्पॉवर वीमेन ऑन यूरोलॉजी 2026’ सम्मेलन में देशभर की लगभग 100 महिला यूरोलॉजिस्ट के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप, सेमी-लाइव सर्जिकल वीडियो, वैज्ञानिक व्याख्यान, शोध पत्र प्रस्तुतियां, पोस्टर प्रदर्शन और अकादमिक चर्चाएं आयोजित की गईं। इसका उद्देश्य महिला यूरोलॉजिस्ट को अत्याधुनिक तकनीकों और नवीनतम शोध से जोड़ना था।

सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा ने कहा कि देश में लगभग 10 हजार यूरोलॉजिस्ट कार्यरत हैं, लेकिन इनमें महिला विशेषज्ञों की संख्या केवल लगभग 100 है, जो कुल संख्या का करीब एक प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि यह अंतर कम करने के लिए इस प्रकार के सम्मेलन बेहद आवश्यक हैं, क्योंकि ये महिला डॉक्टरों को आधुनिक तकनीक सीखने, शोध करने, नेतृत्व क्षमता विकसित करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करते हैं।

यूरोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख डॉ. पवन वासुदेवा ने कहा कि यह केवल एक वैज्ञानिक सम्मेलन नहीं, बल्कि यूरोलॉजी के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को भी नई दिशा प्रदान करेगी।

सम्मेलन में एमएस डॉ. चारू बंबा, प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना, डॉ. एन. राजामहेश्वरी सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक महिला डॉक्टर यूरोलॉजी जैसे चुनौतीपूर्ण चिकित्सा क्षेत्र को अपने करियर के रूप में चुनेंगी।

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