TB Screening App: अब मोबाइल फोन से होगी टीबी की शुरुआती स्क्रीनिंग, AI आधारित ‘स्वासा’ ऐप ने ट्रायल में दिखाई 80% तक सटीकता

TB Screening App: अब मोबाइल फोन से होगी टीबी की शुरुआती स्क्रीनिंग, AI आधारित ‘स्वासा’ ऐप ने ट्रायल में दिखाई 80% तक सटीकता
नई दिल्ली। देश में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) की समय रहते पहचान करने की दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ‘स्वासा’ ऐप एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। केवल मोबाइल फोन पर कुछ सेकेंड तक खांसी रिकॉर्ड करके यह ऐप संभावित टीबी मरीजों की शुरुआती स्क्रीनिंग करने में सक्षम है। फरीदाबाद में 5,800 लोगों पर किए गए ट्रायल में इस तकनीक की स्क्रीनिंग क्षमता करीब 80 प्रतिशत तक प्रभावी पाई गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अस्थमा और सीओपीडी जैसी बीमारियों के लिए सफल परीक्षण के बाद अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इस तकनीक का टीबी स्क्रीनिंग के लिए संयुक्त मूल्यांकन कर रहे हैं। यदि भविष्य में इसके परिणाम व्यापक स्तर पर सफल रहते हैं, तो इसे राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में भी शामिल किया जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ‘स्वासा’ ऐप टीबी की अंतिम पुष्टि नहीं करता, बल्कि केवल संभावित मरीजों की पहचान करता है। जिन लोगों की स्क्रीनिंग पॉजिटिव आती है, उनकी पुष्टि के लिए चेस्ट एक्स-रे, बलगम की सीबीएनएएटी (CBNAAT) या ट्रूनेट जांच और अन्य मानक परीक्षण अनिवार्य रूप से किए जाते हैं।
एम्स दिल्ली के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि यह ऐप खांसी की आवाज में मौजूद विशेष अकॉस्टिक बायोमार्कर्स का विश्लेषण करके टीबी के जोखिम का आकलन करता है। फरीदाबाद ट्रायल में इसकी सेंसिटिविटी 80 से 82 प्रतिशत रही, यानी 100 वास्तविक टीबी मरीजों में से लगभग 80 से 82 मरीजों की सही पहचान हुई। वहीं इसकी स्पेसिफिसिटी 65 से 70 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे उन लोगों की भी पहचान हो सकी जिन्हें टीबी नहीं थी।
उन्होंने बताया कि जहां विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध नहीं हैं, वहां एआई आधारित एक्स-रे विश्लेषण डॉक्टरों की सहायता कर रहा है। इसके अलावा लार (सलाइवा) आधारित टीबी जांच तकनीक पर भी शोध जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की एआई आधारित स्क्रीनिंग तकनीक दूरदराज और संसाधन-विहीन क्षेत्रों में टीबी की शुरुआती पहचान को आसान बनाएगी, जिससे मरीजों का समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा और टीबी मुक्त भारत अभियान को नई गति मिलेगी।





