NPPA Drug Prices: रेबीज रोधी इंजेक्शन हुआ महंगा, 39 आवश्यक दवाओं की नई कीमतें तय

NPPA Drug Prices: रेबीज रोधी इंजेक्शन हुआ महंगा, 39 आवश्यक दवाओं की नई कीमतें तय

नई दिल्ली। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने आवश्यक दवाओं की नई खुदरा कीमतें अधिसूचित कर दी हैं। इसके तहत रेबीज रोधी इम्युनोग्लोबुलिन की कीमत में बढ़ोतरी की गई है, जबकि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, एचआईवी और आंखों के संक्रमण जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली 39 आवश्यक दवाओं की कीमतें निर्धारित कर दी गई हैं। सरकार का उद्देश्य मरीजों को आवश्यक दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना और कंपनियों द्वारा मनमानी कीमत वसूलने पर रोक लगाना है।

एनपीपीए के अनुसार एंटी-रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की खुदरा कीमत 112.19 रुपये प्रति मिलीलीटर से बढ़ाकर 119.48 रुपये प्रति मिलीलीटर कर दी गई है। यानी इसकी कीमत में लगभग 6.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह संशोधन राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) के तहत दवाओं की कीमतों की नियमित समीक्षा के बाद किया गया है।

प्राधिकरण की 148वीं बैठक में 39 दवा फॉर्मूलेशन की नई खुदरा कीमतें भी तय की गईं। इनमें हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एम्लोडिपिन, बिसोप्रोलोल और टेल्मीसार्टन के संयोजन वाली टैबलेट की कीमत 14.74 रुपये प्रति टैबलेट निर्धारित की गई है।

इसी तरह हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने वाली क्लोपिडोग्रेल, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन युक्त कैप्सूल की कीमत 26.37 रुपये प्रति कैप्सूल तय की गई है। वहीं नेपैफिनेक और मोक्सीफ्लोक्सासिन युक्त आई ड्रॉप की कीमत 68.64 रुपये प्रति मिलीलीटर निर्धारित की गई है।

एनपीपीए ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई दवा निर्माता या मार्केटिंग कंपनी निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूलती है, तो उसे अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज सहित सरकार को वापस करनी होगी। प्राधिकरण समय-समय पर दवाओं की कीमतों की समीक्षा करता है ताकि आवश्यक दवाएं आम लोगों की पहुंच में बनी रहें।

इस बीच एनपीपीए ने हैदराबाद स्थित बायोलॉजिकल ई की प्न्यूबेवैक्स-14, जो भारत की पहली 14-वैलेंट न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन है, उसे पांच वर्षों के लिए मूल्य नियंत्रण से छूट प्रदान की है। यह छूट इसलिए दी गई है क्योंकि यह भारत में विकसित और पेटेंट प्राप्त नई वैक्सीन है।

हालांकि प्राधिकरण ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह व्यावसायिक उत्पादन और बाजार में बिक्री शुरू होने की तारीख, अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तथा रिटेलर मूल्य की पूरी जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही पांच वर्ष की छूट अवधि समाप्त होने से तीन महीने पहले निर्धारित नियमों के अनुसार नई मूल्य स्वीकृति या सीलिंग प्राइस लागू करना होगा।

 

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