Cyber Fraud: एआई की मदद से 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार

Cyber Fraud: एआई की मदद से 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का भंडाफोड़, पांच आरोपी गिरफ्तार
रिपोर्ट: तीर्थांकर सरकार
नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सरिता विहार थाना पुलिस ने “ऑपरेशन साई हॉक” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का इस्तेमाल कर एक बड़ी कंपनी के निदेशक की आवाज और तस्वीर का दुरुपयोग करते हुए करीब 10 करोड़ रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास, वंश, फैयाज आलम, अमित और बलबीर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह आधुनिक तकनीक और एआई आधारित फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर कंपनियों और लोगों को निशाना बना रहा था। मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
सरिता विहार जिला पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) जसबीर सिंह ने बताया कि एसीपी अनिल शर्मा की निगरानी और थाना प्रभारी युद्धवीर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मुंबई स्थित एक बड़ी कंपनी के निदेशक की आवाज को एआई तकनीक की मदद से तैयार किया और उनकी तस्वीर का उपयोग कर कंपनी के डीजीएम को व्हाट्सएप संदेश भेजे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने 3 जून से 15 जून के बीच कंपनी के अधिकारियों को विश्वास में लेकर अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर करवाई। इस दौरान कुल 63 बैंक खातों में लगभग 10 करोड़ रुपये जमा कराए गए। जांच में पता चला कि इन खातों में से एक खाता सरिता विहार क्षेत्र में संचालित किया जा रहा था, जिसके आधार पर पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक व्यक्ति स्थानीय बैंक में 9 लाख रुपये का चेक भुनाने पहुंचा। बैंक प्रबंधक को उसके व्यवहार पर संदेह हुआ और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर बीट अधिकारी नितेश और पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जाल बिछाया और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की और उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और बैंकिंग दस्तावेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था और एआई तकनीक के जरिए लोगों का भरोसा जीतकर उन्हें ठगी का शिकार बनाता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस और मुंबई पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पूरी जानकारी मुंबई पुलिस को भी उपलब्ध करा दी गई है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और संभावना है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और साइबर ठगी के कई और मामलों का खुलासा हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला देश में एआई आधारित साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे की ओर भी संकेत करता है, जिसके खिलाफ सतर्क रहने की आवश्यकता है।





