Uttar Pradesh : हापुड़ में बाइक का कटा सीट बेल्ट का चालान, ऑनलाइन सिस्टम की गलती पर उठे सवाल

Hapur : हापुड़ में एक मोटरसाइकिल का सीट बेल्ट न लगाने के आरोप में ऑनलाइन चालान कटने का मामला सामने आया है। तहसील में बैनामा लेखक के रूप में कार्यरत अधिवक्ता राजकुमार के मोबाइल पर जब ऑनलाइन चालान का संदेश पहुंचा तो उसमें उनकी बाइक पर “सीट बेल्ट उल्लंघन” दर्ज था और इसके लिए 1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था। राजकुमार का कहना है कि बाइक पर सीट बेल्ट का सवाल ही नहीं उठता। ऐसे में यह चालान देखकर पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने इसे तकनीकी त्रुटि मानते हुए संबंधित विभाग से शिकायत कर मामले की जांच की मांग की है। मामला सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक इसकी चर्चा शुरू हो गई। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब मोटरसाइकिल में सीट बेल्ट होती ही नहीं, तो आखिर उसका उल्लंघन कैसे हो सकता है।
सीओ ट्रैफिक राहुल यादव ने कहा कि शिकायत उनके संज्ञान में आई है। प्रथम दृष्टया यह मामला तकनीकी त्रुटि या डेटा एंट्री में हुई गलती का प्रतीत होता है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। यदि चालान में कोई त्रुटि पाई जाती है तो नियमानुसार उसका निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यातायात विभाग का उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। किसी भी वाहन स्वामी को चालान पर आपत्ति होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।
यह घटना सामने आने के बाद ऑनलाइन चालान प्रणाली की सटीकता पर भी सवाल उठने लगे हैं। कैमरा आधारित चालान व्यवस्था को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रभावी माना जाता है, लेकिन इस तरह की घटनाएं सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि वाहन की श्रेणी और उल्लंघन का मिलान ही सही नहीं होगा तो आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कई वाहन स्वामियों ने आशंका जताई कि कहीं भविष्य में उनके साथ भी ऐसा न हो जाए। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी देश के विभिन्न हिस्सों में कार चालकों को हेलमेट न पहनने या दोपहिया वाहन चालकों को ऐसे नियमों के उल्लंघन में चालान मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जो उनके वाहन पर लागू ही नहीं होते। अधिकांश मामलों में बाद में तकनीकी गड़बड़ी या डेटा एंट्री की गलती सामने आई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन किसी भी ऑनलाइन चालान को अंतिम रूप देने से पहले मानवीय सत्यापन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इससे गलत चालान जारी होने की संभावना कम होगी और लोगों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हापुड़ में इस अनोखे चालान के बाद लोगों की जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल है कि क्या अब बाइक चलाने वालों को भी सीट बेल्ट बांधनी पड़ेगी, या फिर यह ट्रैफिक सिस्टम की बड़ी चूक है। जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इस घटना ने ऑनलाइन चालान व्यवस्था को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
