UNCCD COP17: भूमि बहाली और जलवायु चुनौतियों पर मंगोलिया में जुटेगा विश्व, यूएनसीसीडी सीओपी-17 में 197 देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन

UNCCD COP17: भूमि बहाली और जलवायु चुनौतियों पर मंगोलिया में जुटेगा विश्व, यूएनसीसीडी सीओपी-17 में 197 देशों के प्रतिनिधि करेंगे मंथन
नई दिल्ली, 5 जून। मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी बढ़ती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि इस वर्ष मंगोलिया में एक महत्वपूर्ण मंच पर एकत्र होंगे। संयुक्त राष्ट्र के तहत आयोजित संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन के पक्षकार देशों का 17वां सम्मेलन (सीओपी-17) 17 से 28 अगस्त 2026 तक उलानबटार में आयोजित किया जाएगा। ‘भूमि बहाली, उम्मीद बहाली’ (Restore Land, Unlock Opportunities) थीम पर आधारित यह वैश्विक सम्मेलन भूमि संरक्षण, सूखा प्रबंधन और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श का मंच बनेगा। सम्मेलन में यूएनसीसीडी के 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के अलावा सरकारों, उद्योग जगत, नागरिक समाज संगठनों, वैज्ञानिकों, युवाओं, आदिवासी समुदायों, पशुपालकों और किसानों की भागीदारी होगी। यूएनसीसीडी की कार्यकारी सचिव यास्मीन फौआद ने कहा कि भूमि केवल कृषि उत्पादन का आधार नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों, जैव विविधता, रोजगार और सामाजिक स्थिरता की भी नींव है। उन्होंने कहा कि भूमि क्षरण की बढ़ती समस्या के कारण विस्थापन, संसाधनों को लेकर संघर्ष और सामाजिक असुरक्षा जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। उन्होंने बताया कि सीओपी-17 का मुख्य उद्देश्य भूमि पुनर्स्थापन को बढ़ावा देना, जल और भूमि के बीच संबंधों को मजबूत करना तथा सूखा-रोधी विकास मॉडल तैयार करने के लिए व्यावहारिक और निवेश योग्य समाधान विकसित करना है। सम्मेलन के दौरान सरकारों और विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत भूमि किसी न किसी रूप में क्षरण से प्रभावित है। वहीं मेजबान देश मंगोलिया में स्थिति और अधिक गंभीर है, जहां लगभग 77 प्रतिशत भूमि भूमि क्षरण की समस्या का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति खाद्य उत्पादन, पशुपालन और स्थानीय समुदायों की आजीविका पर सीधा प्रभाव डाल रही है। सम्मेलन के दौरान मंत्रिस्तरीय बैठकें, विज्ञान-नीति संवाद, नवाचार प्रदर्शनी, जलवायु वित्तपोषण, भूमि पुनर्स्थापन, सूखा प्रबंधन और सतत भूमि उपयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके अलावा भूमि संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए नई नीतियों और साझेदारियों पर भी विचार किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय चरागाह एवं पशुपालक वर्ष 2026 के दौरान आयोजित हो रहा यह सम्मेलन चरागाह संरक्षण, ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण और भूमि पुनर्स्थापन के लिए वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीओपी-17 के निर्णय आने वाले वर्षों में भूमि संरक्षण और जलवायु अनुकूल विकास की वैश्विक रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।





