
Punjab Forest Department: भगवंत मान सरकार ने वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कर्मचारियों की सेवाएं कीं नियमित
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने ठेका और दिहाड़ी आधारित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वन विभाग के 516 दिहाड़ीदार कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इसके साथ ही उन्होंने वन विभाग के 237 अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को बहाल करने की भी घोषणा की।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों की भलाई, पारदर्शी शासन और मेरिट आधारित भर्ती प्रणाली के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त किया गया है और अब तक 68 हजार से अधिक युवाओं को पूरी तरह मेरिट के आधार पर सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि हर योग्य कर्मचारी को सम्मान, नौकरी की सुरक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमित किए गए कर्मचारी अब 58 वर्ष की आयु तक सेवा दे सकेंगे और उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार 5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि का भी लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा पूरी नहीं कर पा रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी 10 वर्ष या उससे अधिक की सेवाओं को देखते हुए विशेष छूट प्रदान की है ताकि कोई भी पात्र कर्मचारी नियमित होने के लाभ से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लागू की गई रेगुलराइजेशन नीति कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्रदान करती है। जनवरी 2024 में वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार इन कर्मचारियों के लिए पारदर्शी वेतन संरचना भी तय की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम आठवीं और ग्रुप-सी ड्राइवरों के लिए दसवीं पास की शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई थी, लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को राहत देने के लिए मंत्रिमंडल ने विशेष छूट को मंजूरी दी।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछले चार वर्षों में केवल वन विभाग में ही 1,458 दिहाड़ीदार कर्मचारियों को नियमित किया गया है, जबकि नियमित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 342 नए कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई है। इसके अलावा विभाग के 237 अधिकारियों और कर्मचारियों की वर्षों से लंबित पदोन्नतियां भी बहाल की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग के दिहाड़ीदार कर्मचारियों ने वर्षों तक पंजाब के जंगलों, वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार अब विभाग की आय बढ़ाने के लिए जर्जर वन विश्राम गृहों (फॉरेस्ट गेस्ट हाउस) का भी पुनर्विकास करेगी, जिससे पर्यटन और राजस्व दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अब तक केवल उन्हीं फाइलों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनसे आम लोगों और कर्मचारियों का भला हुआ है। पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी की जाती थी, जबकि वर्तमान सरकार हर कर्मचारी को सम्मान और सुरक्षित भविष्य देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के दौरान कई नियमित हुए कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने 10 से 25 वर्ष तक दिहाड़ी कर्मचारी के रूप में सेवाएं दीं, लेकिन पूर्व सरकारों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का आभार जताते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति से अब उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो गया है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक, वन विभाग के सचिव के.के. यादव तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे।





