GTB Hospital Car Seized Case: गुरु तेग बहादुर अस्पताल से अल्टो कार उठाने पर हंगामा, परिजनों ने शव रखकर किया प्रदर्शन

GTB Hospital Car Seized Case: गुरु तेग बहादुर अस्पताल से अल्टो कार उठाने पर हंगामा, परिजनों ने शव रखकर किया प्रदर्शन
रिपोर्ट: रवि डालमिया
दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब उत्तर प्रदेश के संभल से अपने परिजन का शव लेने आए परिवार की अल्टो कार अचानक अस्पताल परिसर से गायब हो गई। परिवार का आरोप है कि बिना किसी नोटिस, सूचना या कानूनी प्रक्रिया के एक प्राइवेट क्रेन उनकी कार उठाकर ले गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और नाराज परिजनों ने सड़क पर शव रखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
जानकारी के मुताबिक संभल निवासी परिवार उस्मानपुर इलाके में मृत हुए अपने रिश्तेदार का शव लेने गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचा था। परिवार के लोग जब मोर्चरी से शव लेकर बाहर निकले तो अस्पताल परिसर में खड़ी उनकी अल्टो कार वहां नहीं मिली। काफी देर तक उन्हें यह समझ नहीं आया कि वाहन आखिर गया कहां। बाद में अस्पताल के सिक्योरिटी गार्ड से पता चला कि एक क्रेन कार को उठाकर ले गई है।
परिजनों का आरोप है कि उन्हें वाहन हटाने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और ना ही मौके पर कोई सीज़र मेमो या दस्तावेज सौंपा गया। परिवार का कहना है कि कार को बिना जानकारी दिए उठाना पूरी तरह गलत है, खासकर तब जब वे अपने परिजन के शव को लेने अस्पताल आए थे। उनका आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान नहीं रखा गया।
बताया जा रहा है कि संबंधित अल्टो कार दिल्ली में ELV यानी एंड ऑफ लाइफ व्हीकल की श्रेणी में दर्ज थी। हालांकि वाहन मालिक का दावा है कि उसके पास उत्तर प्रदेश में वाहन चलाने की पांच साल तक की वैध अनुमति मौजूद है और उसी वैधता के आधार पर वह दिल्ली आया था। परिवार का कहना है कि इसके बावजूद अस्पताल परिसर से वाहन को उठा लिया गया।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या किसी प्राइवेट एजेंसी को सरकारी अस्पताल परिसर के अंदर से वाहन उठाने का अधिकार है और यदि अधिकार है तो क्या पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया। नियमों के जानकारों के अनुसार यदि किसी एजेंसी को एमसीडी, परिवहन विभाग या ट्रैफिक पुलिस की ओर से अधिकृत कार्रवाई का आदेश होता है, तो वाहन जब्त करने के दौरान दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करना, सीज़र रिकॉर्ड बनाना और संबंधित विभागों को सूचना देना जरूरी होता है। खासतौर पर किसी सरकारी अस्पताल और मोर्चरी जैसे संवेदनशील स्थान पर कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त सावधानी अपेक्षित मानी जाती है।
घटना से नाराज परिवार ने अस्पताल के बाहर सड़क पर शव रखकर जाम लगा दिया और जमकर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिजनों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि वाहन को उठाने वाली क्रेन खुद को एमसीडी से जुड़ी एजेंसी बता रही थी। हालांकि अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कार्रवाई वैध आदेश के तहत हुई थी या नहीं और क्या सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में वाहन जब्ती की प्रक्रिया, प्राइवेट एजेंसियों की भूमिका और ELV नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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