Cyber Fraud: बैंक मैनेजर और निवेश सलाहकार बनकर तीन लोगों से 20 लाख रुपये की ठगी, साइबर थाना पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

Cyber Fraud: बैंक मैनेजर और निवेश सलाहकार बनकर तीन लोगों से 20 लाख रुपये की ठगी, साइबर थाना पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

नोएडा। साइबर जालसाजों ने बैंक मैनेजर और निवेश सलाहकार बनकर नोएडा और दिल्ली के तीन लोगों को अलग-अलग तरीकों से अपना शिकार बनाया। जालसाजों ने कहीं ऑनलाइन केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर बैंक खाते से रकम निकाल ली तो कहीं निवेश में कम समय में बेहतर मुनाफा दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये विभिन्न खातों और यूपीआई आईडी में ट्रांसफर करा लिए। वहीं एक अन्य मामले में पीड़ित के क्रेडिट कार्ड का दुरुपयोग कर लाखों रुपये के ट्रांजैक्शन कर दिए गए। तीनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सेक्टर-137 निवासी राजीव चंद्र शुक्ला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह सेक्टर-142 स्थित एसबीआई बैंक से संबंधित ऑनलाइन केवाईसी अपडेट करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान उनके पास अमरनाथ नाम के एक व्यक्ति ने वॉट्सऐप कॉल की। आरोपी ने खुद को बैंक मैनेजर बताया और राजीव को भरोसा दिलाया कि वह ऑनलाइन केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराने में उनकी मदद कर सकता है।

आरोपी ने राजीव के मोबाइल पर एक लिंक भेजा और दूसरे बैंक खाते से जुड़ी जानकारी उसमें अपलोड करने के लिए कहा। पीड़ित ने आरोपी की बातों पर भरोसा करते हुए बताई गई प्रक्रिया का पालन किया। इसी दौरान उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से करीब आधे घंटे के भीतर दो बार में 7.3 लाख रुपये निकाल लिए गए। खाते से बड़ी रकम निकलने के बाद उन्हें साइबर ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।

दूसरे मामले में सेक्टर-49 के बरौला निवासी व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि पिछले साल 29 अक्तूबर को वॉट्सऐप के माध्यम से एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था। आरोपी ने खुद को निवेश सलाहकार बताया और कम समय में निवेश पर बेहतर मुनाफा दिलाने का दावा किया। पीड़ित उसकी बातों में आ गए और आरोपी के कहने पर अलग-अलग बैंक खातों तथा यूपीआई आईडी के माध्यम से रकम ट्रांसफर करना शुरू कर दिया।

जालसाज ने पीड़ित को लगातार निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया। मुनाफे की उम्मीद में पीड़ित ने अपने बैंक खाते के अलावा दोस्त और पत्नी के खातों से भी रकम ट्रांसफर की। इस तरह अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से कुल 7.24 लाख रुपये आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए गए। बाद में जब पीड़ित को निवेश और रिटर्न को लेकर संदेह हुआ तो उसे ठगी का पता चला।

तीसरे मामले में दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन निवासी सजी वर्गीज ने पुलिस को बताया कि वह सेक्टर-100 स्थित एक निजी स्कूल में नौकरी करते हैं। उनके क्रेडिट कार्ड से मार्च महीने में बिना अनुमति के करीब 5.19 लाख रुपये की खरीदारी और अन्य ट्रांजैक्शन किए गए। 11 मार्च को बैंक की ओर से मिले नोटिफिकेशन के बाद उन्हें खाते से हुई गतिविधियों की जानकारी मिली।

जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल अपना क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कराया और संबंधित बैंक में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आईसीआईसीआई और कोटक बैंक के सर्विस रिक्वेस्ट नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। पीड़ित के अनुसार कोटक बैंक की ओर से 92,250 रुपये और 75 हजार रुपये की रकम वापस की जा चुकी है, जबकि बाकी रकम की वापसी अभी नहीं हुई है।

डीसीपी साइबर सेल शैव्या गोयल ने बताया कि तीनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खाते, यूपीआई आईडी और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि रकम के लेनदेन से जुड़े लोगों की पहचान कर आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक कर्मचारी, बैंक मैनेजर या किसी वित्तीय संस्थान का प्रतिनिधि बनकर फोन करने वाले अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम या क्रेडिट कार्ड पिन, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर भेजे जाने वाले अनजान लिंक पर क्लिक करने से भी बचना चाहिए।

इसी तरह निवेश के नाम पर मिलने वाले ऑनलाइन प्रस्तावों में जल्दबाजी में पैसा लगाने के बजाय कंपनी, निवेश प्लेटफॉर्म और सलाहकार की पूरी जानकारी की जांच करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए। बैंक खाते और क्रेडिट कार्ड में ट्रांजैक्शन अलर्ट सक्रिय रखना भी जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देरी किए साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि रकम को फ्रीज कराने की कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके।

 

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