Mental Health: लगातार तनाव को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, नींद और रिश्तों पर भी पड़ रहा असर
नई दिल्ली, 12 अगस्त। तनाव, अकेलापन, काम का दबाव और बदलती जीवनशैली अब केवल मूड खराब होने तक सीमित नहीं हैं। लंबे समय तक बनी रहने वाली ये परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं और व्यक्ति की नींद, कामकाज, रिश्तों तथा रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर डाल सकती हैं। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जरूरत के बीच टेली-मानस जैसी सेवाएं लोगों तक शुरुआती सहायता और मार्गदर्शन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य पर व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थितियों के अलावा परिवार, समाज, आर्थिक स्थिति, हिंसा, भेदभाव और असमानता जैसे कई कारकों का प्रभाव पड़ सकता है। लगातार तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, सामाजिक अलगाव और जीवन में आने वाले बड़े संकट मानसिक परेशानियों का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
आरएमएल अस्पताल, दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेश सिंह शेखावत के अनुसार लगातार उदासी या चिड़चिड़ापन, पसंदीदा गतिविधियों में रुचि कम होना, हर समय चिंता या डर महसूस करना, नींद और भूख में बदलाव, अत्यधिक थकान, एकाग्रता में कमी, निराशा और कामकाज प्रभावित होना मानसिक परेशानी के संकेत हो सकते हैं।
यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहते हैं या रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगते हैं तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।
छोटी आदतें मानसिक स्वास्थ्य के लिए मददगार
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित और पर्याप्त नींद, रोजाना शारीरिक गतिविधि, संतुलित खानपान और परिवार एवं दोस्तों के साथ बातचीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकती है। नशे से दूरी बनाए रखना और तनाव के कारणों को समय रहते पहचानना भी जरूरी है।
मानसिक परेशानी को कमजोरी समझकर नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई स्थितियों के लिए प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं।
गंभीर मामलों में केवल फोन पर मदद पर्याप्त नहीं
डॉ. शेखावत के मुताबिक टेली-मानस के जरिए शुरुआती बातचीत, मार्गदर्शन और जरूरत के अनुसार आगे की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि गंभीर अवसाद, मनोविकृति, आत्मघाती विचार, लंबे समय से चल रही मानसिक बीमारी या ऐसी स्थिति जिसमें दवा अथवा अस्पताल में भर्ती की जरूरत हो, उनमें आमने-सामने विशेषज्ञ उपचार आवश्यक हो सकता है।
ऐसे मामलों में मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन और उचित उपचार जरूरी होता है। फोन पर मिलने वाली सहायता शुरुआती कदम हो सकती है, लेकिन गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ और अस्पताल तक पहुंचना महत्वपूर्ण है।
36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सेवाएं
देश के 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 53 टेली-मानस सेल 20 भाषाओं में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। अगस्त 2026 तक इस सेवा के जरिए 42 लाख से अधिक कॉल संभाले जाने की जानकारी सामने आई है। यह मानसिक स्वास्थ्य सहायता की बढ़ती जरूरत को भी दर्शाता है।



