Heart Transplant India: अनुवांशिक हृदय रोग से जूझ रहे दो भाइयों को हार्ट ट्रांसप्लांट से मिली नई जिंदगी

Heart Transplant India: अनुवांशिक हृदय रोग से जूझ रहे दो भाइयों को हार्ट ट्रांसप्लांट से मिली नई जिंदगी
नई दिल्ली, 28 मई : दिल की एक दुर्लभ और गंभीर जेनेटिक बीमारी ने एक ही परिवार के दो भाइयों को जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ने पर मजबूर कर दिया। दोनों भाइयों को एडवांस्ड डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी (डीसीएम) नामक खतरनाक हृदय रोग हुआ, जिसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर होकर शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पातीं। बीमारी इतनी बढ़ गई कि दोनों के लिए हार्ट ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का अंतिम विकल्प बन गया।
दिल्ली के Fortis Escorts Heart Institute के वरिष्ठ कार्डिएक सर्जन Dr. Z. S. Meharwal और उनकी टीम ने दोनों भाइयों का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट कर नई जिंदगी दी। बड़े भाई में बीमारी के लक्षण 16 वर्ष की उम्र में सामने आए थे और वर्ष 2015 में उनका हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया था। इसके करीब 11 साल बाद छोटे भाई में भी वही लक्षण दिखाई दिए। लगातार हार्ट फेल, सांस लेने में दिक्कत और अत्यधिक कमजोरी के बाद जांच में अंतिम स्टेज की डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी की पुष्टि हुई।
डॉक्टरों के अनुसार छोटे भाई का ट्रांसप्लांट तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि डोनर और मरीज की रक्त धमनियों के आकार में काफी अंतर था। बावजूद इसके विशेषज्ञों की टीम ने सफल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई। ऑपरेशन के बाद मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह भारत के दुर्लभ मामलों में से एक हो सकता है, जहां एक ही परिवार के दो भाइयों का एक ही अस्पताल और एक ही सर्जिकल टीम द्वारा सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि जेनेटिक हृदय रोग कई वर्षों तक बिना लक्षण के छिपे रह सकते हैं। इसलिए जिन परिवारों में दिल की बीमारी का इतिहास हो, वहां अन्य सदस्यों की समय-समय पर कार्डियक स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, जेनेटिक स्क्रीनिंग और सही उपचार से गंभीर हृदय रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि परिवार में किसी सदस्य को कम उम्र में हार्ट फेल, अचानक बेहोशी, सांस फूलने या दिल की बीमारी की समस्या रही हो तो पूरे परिवार की जांच जरूर करानी चाहिए।





