AI in Cancer Treatment: डिजिटल इंडिया पर छाया एम्स का ‘आई ऑन्कोलॉजी डॉट एआई’, कैंसर इलाज में भारत की एआई ताकत को मिली राष्ट्रीय पहचान
AI in Cancer Treatment: डिजिटल इंडिया पर छाया एम्स का ‘आई ऑन्कोलॉजी डॉट एआई’, कैंसर इलाज में भारत की एआई ताकत को मिली राष्ट्रीय पहचान
नई दिल्ली, 28 मई : भारत अब हेल्थ टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। इसी दिशा में एम्स दिल्ली और सी-डैक पुणे द्वारा विकसित स्वदेशी एआई आधारित कैंसर स्क्रीनिंग और क्लिनिकल सपोर्ट प्लेटफॉर्म ‘आई ऑन्कोलॉजी डॉट एआई’ को डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से शामिल किया गया है। इस उपलब्धि को भारत की स्वास्थ्य तकनीक और एआई रिसर्च के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
एम्स दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रोफेसर और इस परियोजना के प्रमुख डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य कैंसर की पहचान और इलाज को अधिक सटीक, तेज और किफायती बनाना है। एआई तकनीक से लैस यह प्लेटफॉर्म डॉक्टरों को बेहतर चिकित्सकीय निर्णय लेने में मदद करता है। इसके माध्यम से मरीज की स्थिति के अनुसार उपयुक्त दवाओं, उपचार पद्धतियों और विशेषज्ञ अस्पतालों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक भारत की कैंसर देखभाल व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी रहती है, वहां यह एआई प्लेटफॉर्म शुरुआती जांच और सही उपचार तय करने में मददगार साबित हो सकता है।
डिजिटल इंडिया प्लेटफॉर्म पर फीचर होने के बाद ‘आई ऑन्कोलॉजी डॉट एआई’ को स्वास्थ्य सेवा नवाचार और स्वदेशी एआई अनुसंधान के मजबूत मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारतीय संस्थान अब एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सीधे मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
इस परियोजना में एम्स दिल्ली, राष्ट्रीय कैंसर संस्थान झज्जर और सी-डैक पुणे की टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से तैयार यह प्लेटफॉर्म ट्रांसलेशनल रिसर्च, मेडिकल इनोवेशन और टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह की तकनीकों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू होता है तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकेगा।


