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Ambedkar Jayanti AIIMS Event: एम्स में गूंजा ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का संदेश

Ambedkar Jayanti AIIMS Event: एम्स में गूंजा ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का संदेश

नई दिल्ली, 19 अप्रैल: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जेएलएन ऑडिटोरियम में एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में एम्स एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ की ओर से बड़ी संख्या में डॉक्टर, फैकल्टी सदस्य, कर्मचारी, छात्र और विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम ने सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के महत्व को एक बार फिर मजबूती से सामने रखा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान उपस्थित वक्ताओं ने अंबेडकर के जीवन, उनके संघर्षों और देश के निर्माण में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार आज भी समाज को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके सिद्धांतों को अपनाकर ही एक समतामूलक समाज का निर्माण संभव है।

इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. बत्ती लाल बैरवा ने सामाजिक न्याय और समानता विषय पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा को सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए संवैधानिक अधिकारों की जानकारी और जागरूकता को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि समाज में समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित करना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।

कार्यक्रम के सांस्कृतिक हिस्से ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया। कलाकारों ने बाबा साहेब के जीवन संघर्षों पर आधारित नाटक, समूह नृत्य और संगीत प्रस्तुत कर दर्शकों को भावुक और प्रेरित किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अंबेडकर के विचारों और उनके संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मंच पर सम्मानित भी किया गया, जिससे प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिला।

एम्स एससी-एसटी कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष लोकेश कुमार और महासचिव अनिल तेजवान ने कहा कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि अंबेडकर के विचारों को युवाओं तक पहुंचाना और उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो’ का संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के मूल्यों को अपनाने का प्रण लिया। एम्स में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज को जागरूक और प्रेरित करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ।

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