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Noida Double Murder Case: ताऊ-भतीजा हत्याकांड में आरोपी मनोज नागर की जमानत याचिका खारिज

Noida Double Murder Case: ताऊ-भतीजा हत्याकांड में आरोपी मनोज नागर की जमानत याचिका खारिज

नोएडा: सैंथली गांव में हुए चर्चित ताऊ-भतीजा हत्याकांड मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी मनोज नागर की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों और आरोपी के आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे जमानत देना उचित नहीं होगा।

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना अक्टूबर 2025 में दीपावली के दौरान हुई थी, जब पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने वादी पक्ष पर अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में अजयपाल और उनके भतीजे दीपांशु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल फैल गया था और पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी थी।

जांच के दौरान सामने आया कि मनोज नागर ने भी इस फायरिंग में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि उसका नाम शुरुआती एफआईआर में शामिल नहीं था, लेकिन बाद में गवाहों के बयानों के आधार पर उसे आरोपी बनाया गया। केस डायरी में दर्ज गवाहों—अनिल, विमल कुमार और वादी धारा सिंह—के बयानों में उसकी संलिप्तता स्पष्ट रूप से बताई गई है, जिसे अदालत ने भी गंभीरता से लिया।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है। उसके खिलाफ हत्या, लूट, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत करीब 20 मुकदमे दर्ज हैं, जो उसकी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी को केवल सह-आरोपी प्रिंस का दोस्त होने के कारण फंसाया गया है और घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं था। साथ ही यह भी कहा गया कि उसके परिवार में बीमार पिता हैं, जिनकी देखभाल करने वाला वह अकेला सदस्य है।

हालांकि अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मामले की प्रकृति अत्यंत गंभीर है, जिसमें दो लोगों की जान गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा सह-आरोपी प्रिंस और सचिन की जमानत याचिकाएं भी पहले ही खारिज की जा चुकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत इस मामले को लेकर सख्त रुख अपना रही है।

न्यायालय के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा, जबकि मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी। इस निर्णय को पीड़ित पक्ष के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं यह संदेश भी गया है कि गंभीर अपराधों में अदालत सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

 

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संवाददाता

Priyanka Singh

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