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Central Vista project: साउथ ब्लॉक से रक्षा मंत्रालय की विदाई, सेंट्रल विस्टा में नया अध्याय शुरू

Central Vista project: साउथ ब्लॉक से रक्षा मंत्रालय की विदाई, सेंट्रल विस्टा में नया अध्याय शुरू

नई दिल्ली, 3 अप्रैल : करीब एक सदी से देश की रक्षा नीति और सैन्य रणनीति का केंद्र रहा साउथ ब्लॉक अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत निर्मित कर्तव्य भवन-II में स्थानांतरित होने जा रहा है। पूरी प्रक्रिया को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि कामकाज प्रभावित न हो।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वर्ष 1931 से साउथ ब्लॉक में संचालित हो रहा मंत्रालय अब अपने 100 से अधिक कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से नए परिसर में शिफ्ट कर रहा है। यह बदलाव केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली में बड़े सुधार का संकेत भी माना जा रहा है। सेंट्रल विस्टा परियोजना का उद्देश्य बिखरे सरकारी दफ्तरों को एकीकृत करना, आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और निर्णय प्रक्रिया को तेज व प्रभावी बनाना है।

नए कर्तव्य भवन-II में रक्षा मंत्रालय का पूरा शीर्ष ढांचा स्थापित किया जाएगा। यहां रक्षा मंत्री का कार्यालय, उनका सचिवालय, सेना और नौसेना प्रमुखों के दफ्तर, मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच, एडजुटेंट जनरल ब्रांच, रक्षा जनसंपर्क विभाग और तीनों सेनाओं के पीआरओ कार्यालय स्थानांतरित होंगे। इसके अलावा आर्मी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशन का दफ्तर भी यहीं से काम करेगा। इस भवन में कुल 225 कमरे आवंटित किए गए हैं, जिन्हें अत्याधुनिक, सुरक्षित और डिजिटल सुविधाओं से लैस किया गया है।

इतिहास का साक्षी रहा साउथ ब्लॉक
रेड सैंड स्टोन से निर्मित साउथ ब्लॉक का डिजाइन हर्बर्ट बेकर ने तैयार किया था। यह इमारत देश के कई ऐतिहासिक निर्णयों की गवाह रही है। 1971 का भारत-पाक युद्ध के दौरान यहीं रणनीति बनाई गई थी, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ ने अहम फैसले लिए थे।

इसके अलावा हाल के वर्षों में उड़ी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों की रणनीति भी इसी इमारत से संचालित हुई।

संग्रहालय में बदले जाएंगे ऐतिहासिक भवन
रक्षा मंत्रालय के स्थानांतरण के बाद साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक को खाली नहीं छोड़ा जाएगा। सरकार की योजना इन दोनों ऐतिहासिक इमारतों को मिलाकर ‘युग युगेन भारत’ नामक राष्ट्रीय संग्रहालय में बदलने की है, जहां आम लोग देश के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास को करीब से देख सकेंगे।

सेंट्रल विस्टा के तहत यह बदलाव नए भारत के तेज, डिजिटल और केंद्रीकृत शासन मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो प्रशासनिक दक्षता और समन्वय को और मजबूत करेगा।

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