Public Trust Bill 2026: स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘जेल’ से ‘जुर्माना’ की ओर बड़ा बदलाव
नई दिल्ली, 3 अप्रैल : संसद के दोनों सदनों से पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) विधेयक, 2026 देश में कारोबारी माहौल और आम जनजीवन को सरल बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस विधेयक के जरिए छोटे-मोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए अनुपालन को आसान बनाया गया है।
विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों द्वारा संचालित 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इनमें से 717 प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया गया है, जबकि 67 प्रावधान ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाने के लिए संशोधित किए गए हैं। कुल मिलाकर 1000 से अधिक छोटे अपराधों को तर्कसंगत बनाते हुए नियामकीय ढांचे को सरल किया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940, फार्मेसी एक्ट, 1948, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006, क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010 और नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन एक्ट, 2021 जैसे प्रमुख कानूनों में संशोधन लागू होंगे।
नए प्रावधानों के तहत छोटे प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए जेल की सजा हटाकर अब ग्रेडेड आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही मामलों के निपटारे के लिए एडजुडिकेशन मैकेनिज्म लागू किया गया है, जिससे अदालतों पर बोझ कम होगा और विवादों का तेजी से समाधान संभव हो सकेगा।
विशेष रूप से ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में दस्तावेजों के रखरखाव या सूचना न देने जैसे मामूली उल्लंघनों को अब सिविल पेनल्टी के दायरे में लाया गया है। केंद्र और राज्य सरकारें इसके लिए एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी नियुक्त करेंगी, जो नोटिस, सुनवाई और अपील की प्रक्रिया के तहत मामलों का निपटारा करेंगी।
सरकार का कहना है कि ये सुधार अनुपालन को सरल, पारदर्शी और पूर्वानुमेय बनाएंगे, साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों में सख्ती बरकरार रखी जाएगी। यह कदम न केवल मुकदमों की संख्या घटाएगा, बल्कि व्यवसाय और नियामकों के बीच विश्वास को भी मजबूत करेगा।


