Sector 150 accident Noida: सेक्टर 150 हादसा पानी से बाहर निकाली गई युवराज की कार, SIT और पुलिस जांच में जुटी

Sector 150 accident Noida: सेक्टर 150 हादसा पानी से बाहर निकाली गई युवराज की कार, SIT और पुलिस जांच में जुटी
नोएडा के सेक्टर-150 क्षेत्र में हुए दर्दनाक हादसे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है। हादसे के करीब तीन दिन बाद एनडीआरएफ की टीम ने उस कार को पानी से बाहर निकाल लिया, जिसमें सवार होकर युवराज जा रहे थे। कार कई घंटे तक पानी के भीतर पड़ी रहने के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली। कार के शीशे पूरी तरह टूट चुके थे और सनरूफ भी क्षतिग्रस्त पाया गया। आशंका जताई जा रही है कि पानी के अत्यधिक दबाव के कारण कार के शीशे टूटे होंगे। कार के बाहर आने के बाद अब यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं किसी तकनीकी खराबी की वजह से तो यह हादसा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार विशेष जांच दल द्वारा कार की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि दुर्घटना के कारणों की गहराई से पड़ताल की जा सके।
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम को पद से हटा दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। एसआईटी ने मंगलवार से जांच शुरू कर दी और सबसे पहले नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर करीब दो घंटे तक दस्तावेजों और अधिकारियों से जानकारी ली। इसके बाद टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई। एसआईटी को पांच दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। उधर, इस मामले में नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विजटाउन के मालिक और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना के बाद से सेक्टर-150 क्षेत्र में जलभराव, अधूरी परियोजनाओं और सुरक्षा इंतजामों को लेकर प्रशासन और विकास प्राधिकरण पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। बताया गया कि भारी बारिश और जलभराव के दौरान युवराज की कार पानी से भरे गड्ढे या अंडरपास में फंस गई थी, जिससे वह बाहर नहीं निकल सके और कार समेत डूबने से उनकी मौत हो गई।
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है, जिसमें युवराज की मौत का कारण दम घुटना बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार उनके फेफड़ों में करीब साढ़े तीन लीटर पानी पाया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह काफी समय तक पानी में फंसे रहे। इस रिपोर्ट के बाद हादसे की गंभीरता और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप और गहरे हो गए हैं। अब सभी की नजरें एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
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