Surajkund International Crafts Mela: आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण बना 39वां शिल्प महोत्सव, राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष का संबोधन

Surajkund International Crafts Mela: आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण बना 39वां शिल्प महोत्सव, राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष का संबोधन

रिपोर्ट :कोमल रमोला

चंडीगढ़ 15 फरवरी – हरियाणा के माननीय राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का मजबूत व जीवंत उदाहरण है। यह लोकल से ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत के मंत्र से प्रेरित है। सूरजकुंड मेला एक वाइब्रेंट प्लेटफार्म के तौर पर उभर रहा है। यह संस्कृति और परंपरा की ऐसी झांकी है जहाँ ट्रेडिशन और नवाचार मिलकर कार्य करते हैं। माननीय राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष रविवार को 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव के समापन अवसर पर अपना संबोधन दे रहे थे

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मेले से ही लोकल शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल पहचान मिली है और प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में सजग है। इससे पहले माननीय राज्यपाल व उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मित्रा घोष ने सहकारिता, पर्यटन एवं विरासत मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल, मेयर प्रवीण बत्रा जोशी के साथ मेले का अवलोकन किया। अवलोकन के दौरान सभी मेहमानों का आपणा घर पर हरियाणवी पगड़ी से स्वागत किया गया। इस बीच माननीय राज्यपाल ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिल्पकारों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया।

सूरजकुंड शिल्प मेला को भारतीय सभ्यता और संस्कृति विरासत तथा आत्मनिर्भरता की सामूहिक इच्छा को खूबसूरती से प्रदर्शित करने वाला बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मेला विविधता में एकता की भावना को बल दे रहा है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया भर के कारीगरों, बुनकरों और लोक कलाकारों के कौशल, दृढ़ निश्चय व रचनात्मकता की झलक मेले में दिखाई दी है।

हरियाणा के राज्यपाल ने कहा कि मेले में मिस्र ने चौथी बार पार्टनर नेशन के तौर पर हिस्सा लिया है, जिससे हमारे सांझा संस्कृति और सभ्यता के संबंधों को मजबूती मिली है। वहीं इस बार मेले में थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय ने भी अपनी वाइब्रेंट लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित कर मेले को बेहतर बनाया है। मेले में 50 से ज्यादा देशों के लगभग 800 कलाकारों और कारीगरों ने हिस्सा लेकर पिछले वर्षों की तुलना में मेले के बढ़ते ग्लोबल रुतबे को मजबूती प्रदान की है। यह मेला पारंपरिक शिल्प के संरक्षण को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्कृति सहयोग को बढ़ावा देने में सहायक है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला दुनिया के संस्कृति और पर्यटन के नक्शे पर अपनी गहरी छाप छोड़ता रहेगा। उन्होंने देश के शिल्पकारों से आह्वान किया कि वे भारतीय कला, संस्कृति को आगे बढ़ाने की दिशा में अपना योगदान दें।

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