RG Kar Case: मंत्री नहीं बनीं तो भी कोई दुख नहीं, बेटी को न्याय दिलाना ही मेरा मकसद- रत्ना देबनाथ

RG Kar Case: मंत्री नहीं बनीं तो भी कोई दुख नहीं, बेटी को न्याय दिलाना ही मेरा मकसद- रत्ना देबनाथ
आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई चर्चित रेप और मर्डर केस की पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने राजनीति में आने की असली वजह बताते हुए कहा है कि उनका मकसद कभी सत्ता या मंत्री पद हासिल करना नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि वह सिर्फ अपनी बेटी को न्याय दिलाने और जनता की सेवा करने के लिए राजनीति में आई हैं। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर भी उन्हें कोई नाराजगी या निराशा नहीं है।
रत्ना देबनाथ की बेटी की अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में कथित तौर पर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे पश्चिम बंगाल को झकझोर दिया था और राज्यभर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठे थे।
सोमवार को मीडिया से बातचीत में रत्ना देबनाथ ने कहा कि उन्होंने कभी मंत्री बनने के बारे में सोचा तक नहीं था। उन्होंने कहा कि राजनीति उनके जीवन का हिस्सा कभी नहीं रही, लेकिन बेटी के साथ हुई घटना के बाद उन्होंने न्याय की लड़ाई लड़ने का फैसला किया। उनका कहना था कि उन्हें हमेशा भरोसा था कि उनकी बेटी को न्याय मिलेगा, चाहे वह विधायक बनें या नहीं।
रत्ना देबनाथ ने कहा कि पार्टी की तरफ से कभी उनसे मंत्री पद को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सत्ता हासिल करना या मंत्रिमंडल में शामिल होना उनकी प्राथमिकता कभी नहीं रही। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाना और जनता की सेवा करना है।
उनका यह बयान उस समय सामने आया जब पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री द्वारा मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। पनिहाटी विधानसभा सीट से विधायक बनीं रत्ना देबनाथ और हिंगलगंज से विधायक रेखा पात्रा को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। हालांकि राजनीतिक गलियारों में दोनों के मंत्री बनने की अटकलें लगाई जा रही थीं।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान इन दोनों नेताओं के नामों पर कोई गंभीर विचार नहीं किया गया था। उनके मुताबिक यह फैसला संगठनात्मक जरूरतों और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया।
वहीं हिंगलगंज से पहली बार विधायक बनीं रेखा पात्रा ने भी मंत्री पद नहीं मिलने के मुद्दे पर ज्यादा प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता अपने क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना है और वे जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहती हैं।
बताया जा रहा है कि भाजपा विधायक स्वपन दासगुप्ता, तापस रॉय और शंकर घोष समेत कुल 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है, जिसके बाद मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 हो गई है।





