Parali Pollution: पराली का धुआं बन रहा दिल का दुश्मन, उत्तर भारत में हाई बीपी का खतरा 15% तक बढ़ा

Parali Pollution: पराली का धुआं बन रहा दिल का दुश्मन, उत्तर भारत में हाई बीपी का खतरा 15% तक बढ़ा
नई दिल्ली। उत्तर भारत में हर साल सर्दियों के मौसम में फैलने वाला पराली का धुआं अब सिर्फ सांस और फेफड़ों की बीमारी का कारण नहीं रह गया है। All India Institute of Medical Sciences की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि फसल अवशेष यानी पराली जलाने से निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों के ब्लड प्रेशर को भी खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है। शोध के मुताबिक जिन इलाकों में पराली जलाने का असर ज्यादा देखा गया, वहां रहने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का खतरा लगभग 15 प्रतिशत अधिक पाया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिसर्च उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों और वायु प्रदूषण के बीच गंभीर संबंध की ओर इशारा करती है। अध्ययन के अनुसार पराली के धुएं में मौजूद महीन प्रदूषक कण शरीर के अंदर सूजन बढ़ाते हैं और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।
एम्स दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रोफेसर अंबुज राय ने बताया कि पराली से निकलने वाला धुआं केवल फेफड़ों पर असर नहीं डालता, बल्कि यह सीधे दिल और रक्त संचार प्रणाली पर भी हमला करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने वाले लोगों में हाई बीपी, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर भारत के कई राज्यों में हर साल बड़े पैमाने पर पराली जलाने की घटनाएं होती हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों पर पड़ता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते पराली जलाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि साफ हवा केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा विषय बन चुकी है। उन्होंने लोगों से प्रदूषण से बचने, मास्क का उपयोग करने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी है।





