IIT Delhi Research: आईआईटी-दिल्ली की रोशनी से बने 43 नए अमीनो एसिड, दवा और प्रोटीन इंजीनियरिंग में बढ़ेंगी संभावनाएं
नई दिल्ली, 14 अगस्त। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिकों ने विजिबल लाइट की मदद से अननेचुरल अमीनो एसिड तैयार करने की नई रासायनिक तकनीक विकसित की है। वैज्ञानिकों के इस शोध से भविष्य में अधिक प्रभावी दवाओं, नए जैव-अणुओं और उन्नत प्रोटीन के विकास के रास्ते खुल सकते हैं। शोध में वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक अमीनो एसिड की संरचना में नए रासायनिक समूह जोड़कर 43 अलग-अलग अननेचुरल अमीनो एसिड और पेप्टाइड के उदाहरण तैयार किए हैं।
यह शोध आईआईटी-दिल्ली के रसायन विज्ञान विभाग के प्रो. रवि पी. सिंह के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने चिरल कॉपर कैटेलिस्ट-लिगैंड सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए एक ऐसी रणनीति विकसित की, जिसके माध्यम से प्राकृतिक अमीनो एसिड में नए रासायनिक समूह चुनिंदा तरीके से जोड़े जा सकते हैं।
अमीनो एसिड प्रोटीन के मूल निर्माण खंड होते हैं। प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अमीनो एसिड की संख्या सीमित होती है, जबकि वैज्ञानिक लंबे समय से ऐसे अननेचुरल अमीनो एसिड विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिनके जरिए प्रोटीन और अन्य जैव-अणुओं में नए गुण पैदा किए जा सकें।
आईआईटी-दिल्ली की टीम की नई तकनीक में विजिबल लाइट का इस्तेमाल किया गया। शोधकर्ताओं ने चिरल कॉपर कैटेलिस्ट-लिगैंड सिस्टम की मदद से रासायनिक प्रतिक्रिया को नियंत्रित किया, जिससे अणुओं की सही त्रि-आयामी संरचना को चुनिंदा तरीके से तैयार करना संभव हुआ।
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने 43 अलग-अलग अननेचुरल अमीनो एसिड और पेप्टाइड के उदाहरण तैयार किए। इन संरचनाओं में नए रासायनिक समूह शामिल किए गए, जिससे भविष्य में विभिन्न जैविक और औषधीय अनुप्रयोगों के लिए नए अणु विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसे अननेचुरल अमीनो एसिड का इस्तेमाल ऐसे जैव-अणु तैयार करने में किया जा सकता है जो प्रोटीन की स्थिरता, सक्रियता और लक्ष्य-विशिष्टता को बेहतर बना सकें। इसका महत्व दवा विकास के क्षेत्र में विशेष रूप से हो सकता है, जहां किसी अणु को शरीर में किसी विशेष लक्ष्य तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और उसकी गतिविधि को नियंत्रित करने की आवश्यकता होती है।
इस तकनीक के संभावित उपयोग केवल दवा विकास तक सीमित नहीं हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका इस्तेमाल प्रोटीन इंजीनियरिंग और उन्नत बायोमटेरियल्स के विकास में भी किया जा सकता है। प्रोटीन की संरचना और कार्य में नियंत्रित बदलाव करने के लिए नए प्रकार के अमीनो एसिड उपयोगी साबित हो सकते हैं।
शोध की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि विजिबल लाइट का इस्तेमाल रासायनिक प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए किया गया। इससे जटिल रासायनिक संरचनाओं को तैयार करने के लिए नई रणनीतियों के विकास की संभावना सामने आती है। शोधकर्ताओं ने ऐसी परिस्थितियां विकसित करने का प्रयास किया है जिनमें आवश्यक त्रि-आयामी संरचना वाले अणुओं को चुनिंदा रूप से तैयार किया जा सके।
यह शोध ‘Organic Letters-2026’ में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिक समुदाय में इस तरह के शोध को इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि नए अमीनो एसिड और पेप्टाइड संरचनाएं भविष्य में जैव-चिकित्सा और सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों का आधार बन सकती हैं।
आईआईटी-दिल्ली के शोधकर्ताओं की यह उपलब्धि प्रकाश आधारित रसायन विज्ञान और जैव-अणु निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आगे इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और नए जैव-अणुओं के विकास में इसकी क्षमता का अध्ययन किया जा सकता है।

