Prachand Helicopter: ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर निर्माण में निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ी, 90 फ्यूजलेज तैयार होंगे
नई दिल्ली/बेंगलुरु, 14 अगस्त। स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ के उत्पादन को गति देने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार किया है। एचएएल ने हेलिकॉप्टर के फ्यूजलेज स्ट्रक्चर के निर्माण के लिए अडाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के साथ समझौते किए हैं।
समझौतों के तहत कुल 90 फ्यूजलेज स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे। इनमें से 48 फ्यूजलेज का निर्माण बीईएमएल करेगा, जबकि अडाणी डिफेंस 42 फ्यूजलेज तैयार करेगा। इन संरचनाओं का इस्तेमाल ‘प्रचंड’ हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टर के निर्माण में किया जाएगा।
एचएएल के मुताबिक, यह पहली बार है जब हेलिकॉप्टर के फ्यूजलेज निर्माण की जिम्मेदारी में निजी उद्योग को सीधे जोड़ा गया है। इससे उत्पादन प्रक्रिया में औद्योगिक भागीदारी बढ़ने के साथ घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही भारतीय एयरोस्पेस उद्योग में निजी कंपनियों की क्षमता का इस्तेमाल बढ़ेगा।
‘प्रचंड’ भारत में विकसित हल्का लड़ाकू हेलिकॉप्टर है, जिसे विभिन्न सैन्य परिस्थितियों में उपयोग के लिए तैयार किया गया है। इसका डिजाइन और निर्माण देश की स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
एचएएल ने बताया कि तुमकुरु स्थित अपनी नई फैक्ट्री में सशस्त्र बलों के लिए ऑर्डर किए गए 156 प्रचंड हेलिकॉप्टरों का उत्पादन शुरू किया जा चुका है। बड़े ऑर्डर को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। ऐसे में फ्यूजलेज निर्माण में उद्योग की भागीदारी से मुख्य उत्पादन श्रृंखला पर दबाव कम करने और उत्पादन प्रक्रिया को गति देने में मदद मिल सकती है।
बीईएमएल और अडाणी डिफेंस के साथ किए गए समझौते रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी उद्योग के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाते हैं। इससे देश में हेलिकॉप्टर निर्माण के लिए आवश्यक औद्योगिक आधार और सप्लाई नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एचएएल की ओर से निजी उद्योग को हेलिकॉप्टर निर्माण के महत्वपूर्ण हिस्से से जोड़ने का कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की व्यापक नीति के अनुरूप है। घरेलू कंपनियों को उत्पादन प्रक्रिया में शामिल करने से भारत में रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक कौशल विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
156 प्रचंड हेलिकॉप्टरों का उत्पादन शुरू होने के साथ इनके निर्माण में बड़ी संख्या में स्वदेशी कंपनियों की भागीदारी की आवश्यकता होगी। फ्यूजलेज निर्माण के लिए नए साझेदारों को जोड़ना इसी व्यापक उत्पादन नेटवर्क का हिस्सा है।

