उत्तर प्रदेशराज्य

Asthma Inhaler Risk Study: स्पाइन सर्जरी से पहले हड्डियों की जांच जरूरी, इनहेल्ड स्टेरॉयड से बढ़ सकता है खतरा

Asthma Inhaler Risk Study: स्पाइन सर्जरी से पहले हड्डियों की जांच जरूरी, इनहेल्ड स्टेरॉयड से बढ़ सकता है खतरा

अस्थमा के इलाज में आमतौर पर सुरक्षित माने जाने वाले इनहेलर अब स्पाइन सर्जरी के संदर्भ में नए सवाल खड़े कर रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक Inhaled Corticosteroids लेने वाले मरीजों में स्पाइन सर्जरी के बाद जटिलताओं और दोबारा ऑपरेशन का जोखिम बढ़ सकता है। यह शोध Johns Hopkins University और All India Institute of Medical Sciences के विशेषज्ञों की भागीदारी से तैयार किया गया है और इसे Global Spine Journal में प्रकाशित किया गया है।

अध्ययन में सामने आया है कि जोखिम सीधे अस्थमा से नहीं, बल्कि उसके इलाज में इस्तेमाल होने वाले इनहेल्ड स्टेरॉयड से जुड़ा है। जिन मरीजों ने लंबे समय तक इनहेलर का उपयोग किया, उनमें स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी के बाद हड्डियों का सही तरीके से न जुड़ना (नॉन-यूनियन) और इम्प्लांट से जुड़ी जटिलताएं अधिक देखी गईं। यह स्थिति आगे चलकर दोबारा सर्जरी की आवश्यकता बढ़ा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि हड्डियां कितनी मजबूती से आपस में जुड़ती हैं। हालांकि इनहेल्ड स्टेरॉयड सीधे तौर पर कम मात्रा में शरीर में जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग से वे हड्डियों की गुणवत्ता पर सूक्ष्म प्रभाव डाल सकते हैं। इससे हड्डियों के जुड़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और सर्जरी का परिणाम प्रभावित हो सकता है।

Dr. Bhavuk Garg के अनुसार, अब तक इनहेल्ड स्टेरॉयड को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा है, लेकिन लंबे समय तक इनके इस्तेमाल के प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीज जो स्पाइन सर्जरी की योजना बना रहे हैं, उनके लिए पहले से जोखिम का आकलन करना बेहद जरूरी है।

भारत के संदर्भ में यह अध्ययन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यहां Asthma और Osteoporosis जैसी बीमारियां अक्सर देर से पहचान में आती हैं। ऐसे में सर्जरी से पहले हड्डियों की मजबूती, विटामिन डी और कैल्शियम स्तर की जांच, और संभावित जोखिम वाले मरीजों की पहचान करना बेहतर परिणाम के लिए जरूरी कदम हैं।

हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन में केवल संबंध (association) दिखाया गया है, न कि सीधा कारण (causation)। इसलिए मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इनहेलर बंद नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अस्थमा नियंत्रण के लिए जरूरी दवा है। लेकिन जिन मरीजों को स्पाइन सर्जरी करवानी है, उनके इलाज और दवा प्रबंधन को डॉक्टर की निगरानी में सावधानीपूर्वक तय करना बेहद जरूरी है।

यह अध्ययन डॉक्टरों और मरीजों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि इलाज के हर पहलू को समग्र रूप से समझना और संतुलित निर्णय लेना ही सुरक्षित और सफल चिकित्सा का आधार है।

Related Articles

Back to top button