Organ Donation: एक डोनर बचा सकता है 8 जिंदगियां, फिर भी अंगदान में भारत पीछे
नई दिल्ली, 13 अगस्त: किसी एक व्यक्ति की मृत्यु कई जरूरतमंद मरीजों के लिए जिंदगी की नई उम्मीद बन सकती है, लेकिन भारत में अंगदान की स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। देश में मृतक अंगदान की दर प्रति 10 लाख आबादी पर एक से भी कम है, जबकि करीब 90 हजार मरीज राष्ट्रीय ट्रांसप्लांट प्रतीक्षा सूची में अंग मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
विश्व अंगदान दिवस के अवसर पर फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला और नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) की ओर से ‘गिव द गिफ्ट ऑफ लाइफ’ अभियान चलाया गया। अभियान के माध्यम से लोगों से अंगदान का संकल्प लेने और अपने परिवार के साथ इस फैसले पर खुलकर बातचीत करने की अपील की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2020 से 2024 के बीच 2,805 मरीजों की अंग प्रत्यारोपण का इंतजार करते हुए मौत हो गई। हालांकि देश में पिछले कुछ वर्षों में अंग प्रत्यारोपण की संख्या बढ़ी है, लेकिन मृत डोनर से मिलने वाले अंग कुल प्रत्यारोपण का केवल करीब 18 प्रतिशत हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रत्यारोपण की बढ़ती जरूरत के मुकाबले उपलब्ध अंगों की संख्या अभी भी काफी कम है।
नोटो के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि एक मृत डोनर से आठ लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसके अलावा टिश्यू दान के माध्यम से भी कई अन्य मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। ऐसे में अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में ट्रांसप्लांट से जुड़ी सर्जरी, आधुनिक तकनीक और ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाओं में लगातार सुधार हुआ है। अंगों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ग्रीन कॉरिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद पर्याप्त संख्या में अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मरीज लंबी प्रतीक्षा सूची में बने रहते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अंगदान के प्रति लोगों की सोच में बदलाव लाने के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं है। परिवार के स्तर पर भी इस विषय पर बातचीत जरूरी है, ताकि किसी व्यक्ति द्वारा अंगदान की इच्छा व्यक्त किए जाने के बाद उसके निधन की स्थिति में परिवार उस निर्णय को समझ सके और उसका सम्मान कर सके।
विशेषज्ञों ने लोगों से अंगदान का संकल्प लेने के साथ अपने परिजनों को इसकी जानकारी देने की अपील की। उनका कहना है कि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ने से जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है और कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।


