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Digestive Health: जंक फूड और तनाव बना पाचन तंत्र का दुश्मन, लगातार दस्त और कब्ज पर डॉक्टरों की चेतावनी

Digestive Health: जंक फूड और तनाव बना पाचन तंत्र का दुश्मन, लगातार दस्त और कब्ज पर डॉक्टरों की चेतावनी

नई दिल्ली, 28 मई। बदलती लाइफस्टाइल, जंक फूड और बढ़ते तनाव का असर अब लोगों के पाचन तंत्र पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। गैस, कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द और लगातार दस्त जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि कई बार ये गंभीर बीमारियों का संकेत भी होते हैं।

29 मई को मनाए जाने वाले World Digestive Health Day के मौके पर डॉक्टरों ने लोगों को पाचन तंत्र के प्रति जागरूक रहने और समय रहते जांच कराने की सलाह दी है।

Dr. Ram Manohar Lohia Hospital के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की प्रमुख Dr. Vaishali Bhardwaj ने बताया कि इस वर्ष विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस की थीम “लगातार दस्त: लक्षणों को नजरअंदाज न करें” रखी गई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक दस्त होना सामान्य नहीं है और यह संक्रमण, आंतों की बीमारी, फूड पॉइजनिंग, सीलिएक रोग या कोलन कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जंक फूड, अनियमित खानपान, देर रात भोजन, तनाव, कम पानी पीना और फाइबर की कमी लोगों के पाचन तंत्र को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर केवल पेट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर की इम्यूनिटी, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

डॉक्टरों ने सलाह दी कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं, पर्याप्त पानी पिएं और आहार में हरी सब्जियां, फल, दही तथा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। खाना खाने के बाद थोड़ी देर टहलना भी पाचन के लिए फायदेमंद माना गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर की करीब 70 प्रतिशत इम्यूनिटी आंतों से जुड़ी होती है। इसके अलावा ‘हैप्पी हार्मोन’ कहे जाने वाले सेरोटोनिन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भी आंतों में बनता है। यही कारण है कि स्वस्थ पाचन तंत्र मानसिक स्वास्थ्य और मूड को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉक्टरों ने लोगों से पैकेट वाले खाने की बजाय घर का बना भोजन अपनाने, टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना न खाने और सप्ताह में कम से कम पांच दिन 30 मिनट व्यायाम करने की अपील की है। उनका कहना है कि छोटी-छोटी अच्छी आदतें बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह से अधिक समय तक दस्त, कब्ज, मल में खून, अचानक वजन घटना या लगातार पेट दर्द की समस्या बनी रहे तो तुरंत गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण कोलन कैंसर या अल्सर जैसी गंभीर बीमारियों के संकेत हो सकते हैं।

डॉक्टरों ने यह भी सलाह दी कि 50 वर्ष की आयु के बाद हर व्यक्ति को कम से कम एक बार कोलोनोस्कोपी जरूर करानी चाहिए। जिन लोगों के परिवार में पेट के कैंसर का इतिहास रहा हो, उन्हें 40 वर्ष की उम्र के बाद ही नियमित जांच शुरू कर देनी चाहिए।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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