Greater Noida Illegal Colony: ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों को सीवर लाइन से जोड़ने का मामला उजागर, जांच और कार्रवाई की तैयारी

Greater Noida Illegal Colony: ग्रेटर नोएडा में अवैध कॉलोनियों को सीवर लाइन से जोड़ने का मामला उजागर, जांच और कार्रवाई की तैयारी
ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों को नियमों के विरुद्ध प्राधिकरण की सीवर लाइन से जोड़ने का मामला सामने आया है। वैदपुरा और सादुल्लापुर गांव के आसपास बनी छह से अधिक अवैध कॉलोनियों को कथित तौर पर चुपचाप सीवर नेटवर्क से जोड़ दिया गया। मामला सामने आने के बाद प्राधिकरण में हड़कंप मच गया है और अब कार्रवाई की बात कही जा रही है।
जानकारी के अनुसार वैदपुरा और सादुल्लापुर गांव के खसरा संख्या 207, 61, 252, 253, 249 और 250 समेत कई जमीनों पर अवैध रूप से कॉलोनियां विकसित की गई थीं। आरोप है कि परियोजना विभाग के संबंधित वर्क सर्किल-दो की मिलीभगत से इन कॉलोनियों को प्राधिकरण की सीवर लाइन से जोड़ दिया गया।
बताया जा रहा है कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई, लेकिन कई अवैध कॉलोनियां अब भी सीवर नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं। इससे प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में बिना प्राधिकरण की अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद इलाके में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। इन कॉलोनियों के खिलाफ समय-समय पर ध्वस्तीकरण अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन दूसरी ओर इन्हें सीवर जैसी मूलभूत सुविधाएं देकर अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दिए जाने के आरोप लग रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक अवैध कॉलोनियों को विकसित करने वाले बिल्डर फ्लैट खरीदने वाले लोगों को यह भरोसा दिलाते हैं कि भविष्य में कॉलोनी को सीवर लाइन और अन्य सुविधाओं से जोड़ दिया जाएगा।
एके सिंह ने बताया कि अवैध कॉलोनियों को सीवर लाइन से जोड़ने की शिकायतें पहले भी मिली थीं। पूर्व में ऐसी एक अवैध सीवर लाइन को तोड़ने की कार्रवाई भी की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अन्य अवैध कॉलोनी के सीवर नेटवर्क से जुड़े होने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ महीने पहले अवैध कॉलोनियों को लेकर निबंधन विभाग और नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) को पत्र भेजा गया था। इसके तहत ऐसी कॉलोनियों में बिजली कनेक्शन पर रोक लगाने और जमीन के वास्तविक उपयोग के अनुसार ही रजिस्ट्री करने का अनुरोध किया गया था।





