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UP RERA Update: अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों को बड़ी राहत, अब सीधे कर सकेंगे शिकायत दर्ज

UP RERA Update: अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों को बड़ी राहत, अब सीधे कर सकेंगे शिकायत दर्ज

नोएडा सहित पूरे उत्तर प्रदेश में घर और फ्लैट खरीदने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब अपंजीकृत (अनरजिस्टर्ड) परियोजनाओं में निवेश करने वाले खरीदार भी Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority में अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस संबंध में 10 अप्रैल को जारी आदेश को प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है, जिससे हजारों पीड़ित खरीदारों को न्याय मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

अब तक केवल रेरा में पंजीकृत परियोजनाओं के खरीदार ही ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर पाते थे, क्योंकि उन परियोजनाओं और बिल्डरों से जुड़ी पूरी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होती थी। लेकिन अपंजीकृत परियोजनाओं के मामलों में जानकारी की कमी के कारण पीड़ितों को शिकायत दर्ज कराने में काफी परेशानी होती थी और उन्हें लंबे समय तक इधर-उधर भटकना पड़ता था।

नई व्यवस्था के तहत अब अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों को भी शिकायत दर्ज करने का अधिकार दिया गया है, हालांकि इसके लिए उन्हें बिल्डर और परियोजना से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें बिल्डर का संपर्क विवरण, निदेशकों और साझेदारों की जानकारी, परियोजना का स्थान, जमीन से जुड़े दस्तावेज, नक्शा, निर्माण की वर्तमान स्थिति और बिक्री से जुड़ी जानकारी शामिल होगी।

शिकायत मिलने के बाद रेरा की पीठ सबसे पहले यह तय करेगी कि संबंधित परियोजना का पंजीकरण अनिवार्य था या नहीं। यदि जांच में यह सामने आता है कि परियोजना को रेरा में पंजीकृत होना चाहिए था और बिल्डर ने नियमों का पालन नहीं किया, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ऐसी स्थिति में मामले को रेरा के सचिव के पास भेजा जाएगा, जहां बिल्डर को नोटिस जारी कर परियोजना का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए जाएंगे। यदि बिल्डर इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उस पर परियोजना की अनुमानित लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके साथ ही आदेशों की अवहेलना करने पर अतिरिक्त जुर्माना और अधिकतम 3 साल तक की सजा का भी प्रावधान है।

रेरा के अध्यक्ष Sanjay Bhoosreddy ने कहा कि यह कदम घर खरीदारों के अधिकारों की रक्षा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी ऐसी व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि खरीदारों को समय पर न्याय मिल सके और बिल्डरों की जवाबदेही तय हो सके।

इस नई व्यवस्था से खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन्होंने बिना रेरा पंजीकरण वाली परियोजनाओं में निवेश किया है और अब तक किसी कानूनी मंच पर अपनी शिकायत नहीं रख पा रहे थे। अब उनके पास भी अपनी समस्या रखने और न्याय पाने का स्पष्ट रास्ता उपलब्ध हो गया है।

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