GBU Controversy: फीस घोटाले के बाद फिर उठे पुराने भ्रष्टाचार के आरोप, नियुक्ति से खरीद तक सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय

GBU Controversy: फीस घोटाले के बाद फिर उठे पुराने भ्रष्टाचार के आरोप, नियुक्ति से खरीद तक सवालों के घेरे में विश्वविद्यालय
ग्रेटर नोएडा स्थित Gautam Buddha University एक बार फिर विवादों में घिर गया है। हाल ही में फीस घोटाले को लेकर 12 अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने मामलों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आने लगे हैं। नियुक्तियों, मेंटेनेंस और खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितताओं को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में वाटर कूलर खरीद से जुड़ा कथित घोटाला भी सामने आया था, जिसकी शिकायत लखनऊ तक पहुंची थी। हालांकि, आरोप है कि उस समय किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। आरोप यह भी लगाए गए कि संस्थान में लंबे समय तक एकतरफा प्रशासनिक व्यवस्था के चलते मामलों को दबाया गया।
विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर Vikas Panwar ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने तत्कालीन कुलपति RK Sinha और कुलसचिव Vishwas Tripathi पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि फीस जमा होने के बावजूद छात्रों को भुगतान लंबित बताया जाता था और वित्तीय पारदर्शिता की कमी थी।
प्रो. पंवार ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों के नाम पर लोगों से पैसे लिए गए और स्थायी नौकरी का वादा किया गया, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार कर कार्य सीधे कराए गए, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ी।
इसी बीच, विश्वविद्यालय के एक डीन समेत दो लोगों पर एक छात्रा द्वारा यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने की घटना भी सामने आई थी। पीएचडी छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे धमकाया गया और विरोध करने पर उसके करियर को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
अब समाजवादी छात्र सभा ने वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की जांच की मांग उठाई है। संगठन के अध्यक्ष मोहित नागर का आरोप है कि बिना उचित प्रक्रिया और अनुभव के लोगों की भर्ती की गई है, जिससे विश्वविद्यालय की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बीच विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो संस्थान की छवि पर और नकारात्मक असर पड़ सकता है।





