Noida Child Drowning: खेलते-खेलते पानी में डूबा मासूम, लापरवाही बनी मौत की वजह

Noida Child Drowning: खेलते-खेलते पानी में डूबा मासूम, लापरवाही बनी मौत की वजह
नोएडा के बादलपुर कोतवाली क्षेत्र की प्रीत विहार कॉलोनी में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। घरों से निकलने वाले गंदे पानी के लंबे समय से एक जगह जमा होने से बने तालाब ने एक मासूम की जिंदगी छीन ली। बुधवार दोपहर खेलते-खेलते पांच वर्षीय बच्चे की इसी पानी में डूबकर मौत हो गई। घटना के बाद कॉलोनी में मातम पसर गया और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के मुताबिक, प्रीत विहार कॉलोनी में रहने वाले उमेश कुमार अपने परिवार के साथ यहां रहते हैं और ई-रिक्शा चलाकर गुजर-बसर करते हैं। उनका पांच साल का बेटा देव पास के छपरौला गांव स्थित बीएसआर मॉडर्न स्कूल में नर्सरी का छात्र था। बुधवार को वह रोज की तरह स्कूल से घर लौटा और कुछ देर बाद खेलने के लिए बाहर निकल गया। परिवार को क्या पता था कि यह उसका आखिरी दिन साबित होगा।
कॉलोनी में लंबे समय से जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी एक खाली जगह पर जमा हो रहा था। धीरे-धीरे यह स्थान एक छोटे तालाब का रूप ले चुका था, जो आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बना हुआ था। इसी पानी के पास खेलते समय देव का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में जा गिरा। किसी को संभलने का मौका नहीं मिला और वह डूब गया।
जब काफी देर तक बच्चा घर नहीं लौटा तो उसकी मां उसे खोजने के लिए बाहर निकली। उसी दौरान आसपास खेल रहे अन्य बच्चों ने शोर मचाया कि एक बच्चा पानी में डूब गया है। शोर सुनते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चे को तुरंत पानी से बाहर निकाला गया। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच शुरू कर दी। बच्चे के पिता को भी तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद वह घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने परिवार को सांत्वना देने की कोशिश की, लेकिन बेटे की मौत से परिजन गहरे सदमे में हैं।
स्थानीय निवासियों ने इस हादसे के लिए प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कॉलोनी में जल निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर समय रहते इस पानी की निकासी की व्यवस्था कर दी जाती, तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
इस घटना ने एक बार फिर शहरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग अब मांग कर रहे हैं कि ऐसे खतरनाक स्थानों की तुरंत पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाएं दोबारा न हों।





