उत्तर प्रदेशराज्य

RTE Admission आरटीई के तहत दाखिला नहीं देने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

RTE Admission आरटीई के तहत दाखिला नहीं देने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

नोएडा। शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर दाखिला न देने वाले निजी स्कूलों पर सत्र के पहले दिन से ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश जारी किए। बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि कोई भी पात्र बच्चा आरटीई योजना के तहत दाखिले से वंचित न रह जाए।

जिलाधिकारी ने कहा कि आरटीई के अंतर्गत प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेही के साथ पूरी की जानी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग अनिवार्य होगी। उन्होंने निर्देश दिए कि दाखिले की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

आरटीई योजना की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। डीएम ने कहा कि लेखपालों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एनआरएलएम स्वयंसेवी संस्थाओं, ग्राम प्रधानों, आरडब्ल्यूए, जिला पंचायत राज अधिकारी, विकास प्राधिकरण और नगर पालिका की कूड़ा संग्रहण गाड़ियों में लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से डोर-टू-डोर प्रचार किया जाए, ताकि कोई भी पात्र परिवार जानकारी के अभाव में योजना से वंचित न रह जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय स्तर पर किसी भी प्रकार का भेदभाव, अनियमितता या अतिरिक्त शुल्क की मांग स्वीकार्य नहीं होगी। यदि कोई स्कूल शासन के निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उप जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर यह सुनिश्चित किया जाए कि आय प्रमाण पत्र केवल स्थलीय जांच के बाद ही जारी किए जाएं।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी लेखपाल द्वारा गलत या फर्जी आय प्रमाण पत्र जारी किया गया तो उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रत्येक आवेदन का रैंडम सैंपल सत्यापन कराया जाएगा और संदेहास्पद मामलों में दोबारा जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरटीई योजना का लाभ वास्तविक और जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचे और शिक्षा के अधिकार को पूरी सख्ती से लागू किया जाए।

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