12 करोड़ से ज्यादा परिवारों के स्वास्थ्य की रक्षा कर रही आयुष्मान भारत योजना : अपूर्व चंद्रा

नई दिल्ली, 23 सितम्बर: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री – जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) का लक्ष्य भारत की आबादी के 40% लोगों यानी 12.37 करोड़ परिवारों को उत्तम और निशुल्क उपचार सुलभ कराना है।

यह बातें केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने एबी पीएम-जेएवाई के छह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोमवार को निर्माण भवन में कहीं। उन्होंने कहा कि देश में लगभग 55 करोड़ लाभार्थियों को माध्यमिक और तृतीयक देखभाल अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति वर्ष प्रति परिवार 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान किया जा रहा है। जिसे अनेक राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने खर्च पर 10 लाख तक बढ़ा दिया है।

चंद्रा ने बताया कि 1 सितंबर 2024 तक 12,696 निजी अस्पतालों सहित कुल 29,648 अस्पतालों को इस योजना के तहत सूचीबद्ध किया जा चुका है। जिनके माध्यम से लोग स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह योजना दिल्ली और पश्चिम बंगाल को छोड़कर 33 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वित की जा रही है। जल्द ही ओडिशा इसमें शामिल हो जाएगा। यह योजना 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए उपलब्ध है, चाहे उनकी जाति और आर्थिक स्थिति कुछ भी हो। इससे लगभग 6 करोड़ बुजुर्गों को लाभ होगा।

यह योजना व्यापक कवरेज प्रदान करती है जिसमें जनरल मेडिसिन, सर्जरी, ऑन्कोलॉजी और कार्डियोलॉजी जैसी 27 चिकित्सा विशेषताओं में 1,949 चिकित्सा प्रक्रियाएं या सर्जरी शामिल हैं। लाभार्थियों को अस्पताल की सेवाएं, जिनमें दवाएँ (डिस्चार्ज के बाद 15 दिनों की दवा शामिल है), डायग्नोस्टिक्स (भर्ती से तीन दिन पहले तक), भोजन और आवास शामिल हैं, निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। यह योजना पूरी तरह से कागज रहित और नकदी रहित हैं। इसमें परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है। योजना में पहले दिन से ही सभी पहले से मौजूद बीमारियों को कवर किया जाता है।

चंद्रा ने बताया कि लाभार्थियों ने कैंसर, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, जनरल मेडिसिन, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी आदि विशेषज्ञताओं का सर्वाधिक लाभ उठाया है। उन्होंने बताया कि 49% आयुष्मान कार्ड महिलाओं को जारी किए गए हैं और 7.79 करोड़ अस्पताल में भर्ती मामलों में से लगभग 3.61 करोड़ का उपयोग महिलाओं द्वारा किया गया है। इसके अलावा लाभार्थियों को देश में कहीं भी इलाज (पोर्टेबिलिटी) की सुविधा दी गई है जिसके तहत 11.9 लाख अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार पर 3,100 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

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