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Twisha Sharma Case: त्विषा शर्मा मौत मामले में MP सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की, शव सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ी

Twisha Sharma Case: त्विषा शर्मा मौत मामले में MP सरकार ने CBI जांच की सिफारिश की, शव सुरक्षित रखने की चुनौती बढ़ी

भोपाल में चर्चित त्विषा शर्मा मौत मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने इस मामले की CBI जांच की सिफारिश कर दी है। इस फैसले के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है, क्योंकि एक तरफ परिवार लगातार दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस अब तक की जांच के आधार पर इसे आत्महत्या का मामला बता रही है।

अदालत के आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल शव को सुरक्षित रखने को लेकर खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में दूसरा पोस्टमार्टम कराना हो तो शव को बेहद कम तापमान पर संरक्षित रखना जरूरी होगा। सामान्य मॉर्च्यूरी में शव को कुछ दिनों तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक संरक्षण के लिए अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत पड़ती है।

फॉरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. जैन के अनुसार यदि शव पर एम्बामिंग की प्रक्रिया कर दी जाती है तो बाद में दूसरे पोस्टमार्टम की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। यही वजह है कि इस मामले में यह विकल्प आसान नहीं माना जा रहा। परिवार स्वतंत्र और निष्पक्ष दूसरे पोस्टमार्टम की मांग कर रहा है, इसलिए शव को बिना एम्बामिंग के सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

डॉ. जैन ने बताया कि दूसरे पोस्टमार्टम की संभावना बनाए रखने के लिए शव को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संरक्षित करना पड़ता है। सामान्य शवगृहों में तापमान लगभग 4 डिग्री सेल्सियस होता है, जहां शव पांच से सात दिनों तक सुरक्षित रह सकता है। लेकिन माइनस 80 डिग्री तापमान पर संरक्षण अवधि बढ़कर करीब 13 से 15 दिन तक पहुंच सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य प्रदेश में फिलहाल ऐसी अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध नहीं दिख रही। डॉ. जैन के मुताबिक भोपाल या राज्य के अन्य हिस्सों में ऐसे फ्रीजर नहीं हैं जो मानव शव को इतने कम तापमान पर लंबे समय तक सुरक्षित रख सकें। उन्होंने बताया कि माइनस 80 डिग्री वाले फ्रीजर आमतौर पर मेडिकल रिसर्च और दवाओं के संरक्षण के लिए इस्तेमाल होते हैं और उनका डिजाइन मानव शव संरक्षण के अनुकूल नहीं होता।

इस बीच भोपाल के कटारा हिल्स थाना प्रभारी सुनील दुबे ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद पूरे राज्य में ऐसे फ्रीजर की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने सभी जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों को ईमेल भेजकर जानकारी मांगी है कि कहीं सरकारी या निजी संस्थानों में ऐसी सुविधा उपलब्ध है या नहीं। इसके साथ ही अधिकारियों से फोन पर भी संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अब तक किसी जिले से सकारात्मक जवाब नहीं मिला है।

त्विषा शर्मा का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित घर में मिला था। परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ पुलिस अपनी शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला मान रही है।

मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम तब सामने आया जब फरार चल रहे पति समर्थ सिंह ने जबलपुर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की। इससे पहले भोपाल की अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। वहीं उनकी मां और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

भोपाल अदालत ने फिलहाल दूसरे पोस्टमार्टम की मांग को खारिज किया है, लेकिन शव को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि यदि भविष्य में अदालत दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति देती है तो शव को एम्स दिल्ली भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अदालत के आदेश के बाद शव को किस तकनीकी व्यवस्था के तहत सुरक्षित रखा जाएगा और क्या मध्य प्रदेश सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। CBI जांच की सिफारिश के बाद इस केस पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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